अशोक खरात केस में नया खुलासा: ₹15–₹50 में टेलीग्राम पर बेचे जा रहे यौन शोषण के वीडियो, जांच एजेंसियां अलर्ट

0
अशोक खरात केस में नया खुलासा: ₹15–₹50 में टेलीग्राम पर बेचे जा रहे यौन शोषण के वीडियो, जांच एजेंसियां अलर्ट

अशोक खरात केस में नया खुलासा: ₹15–₹50 में टेलीग्राम पर बेचे जा रहे यौन शोषण के वीडियो, जांच एजेंसियां अलर्ट

महाराष्ट्र के नाशिक में सामने आए कथित गॉडमैन अशोक खरात यौन शोषण मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो न सिर्फ इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं, बल्कि टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बेहद सस्ते दाम—सिर्फ ₹15 से ₹50—में बेचे भी जा रहे हैं। यह खुलासा देश में बढ़ते साइबर अपराध और पीड़ितों की निजता के गंभीर उल्लंघन की ओर इशारा करता है।

टेलीग्राम बना अवैध बाजार

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई टेलीग्राम चैनलों और ग्रुप्स के जरिए इन वीडियो को शेयर और बेचने का काम किया जा रहा था। कुछ क्लोज्ड (private) ग्रुप्स में यूजर्स से पैसे लेकर कथित तौर पर वीडियो का एक्सेस दिया जा रहा था। जांच में पाया गया कि इन वीडियो के लिए ₹20 से ₹50 तक की रकम ली जा रही थी, जिससे यह एक संगठित ऑनलाइन रैकेट होने की आशंका बढ़ गई है।

पुलिस का मानना है कि इन ग्रुप्स के एडमिन इस संवेदनशील मामले से जुड़े लोगों की जिज्ञासा का फायदा उठाकर पैसे कमा रहे थे। डिजिटल ट्रेल्स के जरिए अब इन नेटवर्क्स की पहचान की जा रही है।

महाराष्ट्र साइबर पुलिस की कार्रवाई

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

जांच एजेंसियां टेलीग्राम, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय लिंक और अकाउंट्स को ट्रैक कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, कम से कम चार बड़े डिजिटल स्रोतों से इस सामग्री का प्रसार हो रहा था।

साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

हजारों लिंक और अकाउंट हटाए गए

इस पूरे मामले में अब तक बड़ी कार्रवाई करते हुए हजारों ऑनलाइन लिंक और सैकड़ों सोशल मीडिया अकाउंट हटाए जा चुके हैं। विशेष जांच दल (SIT) ने अब तक 4,650 से ज्यादा लिंक और 450 अकाउंट्स डिलीट कर दिए हैं, जहां इस तरह का आपत्तिजनक कंटेंट मौजूद था।

साथ ही, इस सामग्री को अपलोड और शेयर करने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ऐसे वीडियो बनाना, शेयर करना या यहां तक कि फॉरवर्ड करना भी कानूनन अपराध है।

AI और मॉर्फिंग ने बढ़ाई चुनौती

जांच में यह भी सामने आया है कि कई वीडियो असली नहीं बल्कि AI तकनीक या मॉर्फिंग के जरिए बनाए गए हो सकते हैं।

इससे जांच एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि ऐसे वीडियो असली जैसे दिखते हैं और लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि AI आधारित फर्जी कंटेंट की पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है।

असली केस ने हिलाया देश

अशोक खरात, जो खुद को एक ज्योतिषी और ‘गॉडमैन’ बताता था, पर कई महिलाओं के यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप हैं। पुलिस को उसके पास से दर्जनों आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं, जिनमें कथित तौर पर पीड़ित महिलाएं शामिल हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि वह अंधविश्वास और डर का फायदा उठाकर महिलाओं का शोषण करता था। कई मामलों में उसने ‘दैवीय शक्तियों’ का डर दिखाकर महिलाओं को अपने जाल में फंसाया।

अब तक इस मामले में 100 से अधिक शिकायतें सामने आ चुकी हैं और कई पीड़ित महिलाओं के बयान दर्ज किए गए हैं।

पीड़ितों की निजता पर बड़ा खतरा

इस तरह के वीडियो का ऑनलाइन प्रसार पीड़ितों की गरिमा और निजता पर गंभीर हमला है। कानून के अनुसार, किसी भी यौन अपराध से जुड़े पीड़ित की पहचान उजागर करना या उससे संबंधित सामग्री साझा करना दंडनीय अपराध है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके पास ऐसे कोई वीडियो या लिंक आते हैं, तो उन्हें तुरंत डिलीट करें और संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

सोशल मीडिया की जिम्मेदारी

यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है। टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर एन्क्रिप्शन और प्राइवेट ग्रुप्स की वजह से ऐसे अवैध नेटवर्क आसानी से पनप जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि टेक कंपनियों को कंटेंट मॉडरेशन और निगरानी को और मजबूत करना होगा ताकि इस तरह के अपराधों को रोका जा सके।

कानून और सख्ती की जरूरत

सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब इस तरह के साइबर अपराधों पर सख्त कार्रवाई करने की दिशा में काम कर रही हैं। आईटी एक्ट के अलावा भारतीय न्याय संहिता के तहत भी आरोपियों पर कड़ी धाराएं लगाई जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता भी जरूरी है ताकि लोग ऐसे कंटेंट को देखने या शेयर करने से बचें।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed