तमिलनाडु में ‘थलपति’ युग की शुरुआत! विजय ने राज्यपाल से मिलकर पेश किया सरकार बनाने का दावा—क्या TVK साबित कर पाएगी बहुमत?
तमिलनाडु में 'थलपति' युग की शुरुआत! विजय ने राज्यपाल से मिलकर पेश किया सरकार बनाने का दावा—क्या TVK साबित कर पाएगी बहुमत?
तमिलनाडु राजनीति: थलपति विजय और राज्यपाल आर.एन. रवि की मुलाकात ने बदला राज्य का सियासी नक्शा
तमिलनाडु की राजनीति में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में ‘जायंट किलर’ बनकर उभरे सुपरस्टार थलपति विजय ने बुधवार को राजभवन जाकर राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की। अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) की ओर से विजय ने राज्य में अगली सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश कर दिया है।
इस घटनाक्रम ने राज्य में पिछले कई दशकों से चले आ रहे DMK और AIADMK के ‘द्रविड़ वर्चस्व’ को आधिकारिक तौर पर चुनौती दे दी है। हालांकि, बहुमत के आंकड़ों का गणित अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
चुनावी नतीजे: TVK सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से दूर
2026 के विधानसभा चुनावों के नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं। अपनी पहली ही चुनावी पारी में थलपति विजय की TVK ने 108 सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया है। विजय खुद दो निर्वाचन क्षेत्रों, तिरुचिरापल्ली पूर्व और पेरम्बूर, से भारी मतों से विजयी हुए हैं।
विधानसभा का गणित (कुल सीटें: 234, बहुमत का आंकड़ा: 118):
- TVK: 108 सीटें
- DMK गठबंधन: 73 सीटें
- AIADMK+ गठबंधन: 53 सीटें
- कांग्रेस: 5 सीटें
विजय की पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से महज 10 सीटें दूर है। इसी कमी को पूरा करने के लिए अब गठबंधन और ‘समर्थन’ की राजनीति तेज हो गई है।
कांग्रेस का ‘कंडीशनल’ साथ: दोस्त या चुनौती?
विजय के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर कांग्रेस खेमे से आई है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वे TVK को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने को तैयार हैं। हालांकि, कांग्रेस ने एक सख्त शर्त रखी है—“गठबंधन में किसी भी सांप्रदायिक शक्ति को जगह नहीं मिलनी चाहिए।”
कांग्रेस के पास 5 विधायक हैं। यदि ये 5 विधायक TVK के साथ आते हैं, तो विजय का आंकड़ा 113 तक पहुँच जाता है। इसके बावजूद, उन्हें सरकार बचाने और बनाने के लिए अभी भी 5 और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
राज्यपाल के साथ मुलाकात की बड़ी बातें
बुधवार शाम को लोक भवन में हुई मुलाकात के दौरान विजय ने राज्यपाल को उन विधायकों की सूची सौंपी जो उनके नेतृत्व में विश्वास रखते हैं। सूत्रों के मुताबिक, विजय ने दावा किया है कि उनके पास न केवल कांग्रेस का समर्थन है, बल्कि कुछ निर्दलीय और अन्य छोटी पार्टियों के विधायक भी उनके संपर्क में हैं।
राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने कहा कि उन्हें TVK की ओर से सरकार बनाने का दावा प्राप्त हुआ है और वे संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार जल्द ही इस पर निर्णय लेंगे। यदि राज्यपाल संतुष्ट होते हैं, तो विजय को अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है, जिसके बाद उन्हें विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित करना होगा।
DMK की तीखी प्रतिक्रिया: “कांग्रेस का फैसला अदूरदर्शी”
कांग्रेस द्वारा DMK का साथ छोड़कर विजय को समर्थन देने के फैसले से स्टालिन खेमे में भारी नाराजगी है। DMK नेताओं ने इसे “विश्वासघात” करार दिया है। DMK के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कहा कि कांग्रेस का यह फैसला बेहद अदूरदर्शी है और 2029 के लोकसभा चुनावों में इसके गंभीर परिणाम होंगे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को अपनी पारंपरिक सीट कोलाथुर से TVK के उम्मीदवार वी.एस. बाबू के हाथों हार का सामना करना पड़ा है, जो द्रविड़ राजनीति के गिरते ग्राफ का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
क्या होगा विजय का अगला कदम?
विजय के सामने अब दो मुख्य रास्ते हैं:
- AIADMK का रुख: विजय ने कथित तौर पर AIADMK महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) से भी संपर्क साधा है। यदि AIADMK का एक धड़ा या पूरी पार्टी समर्थन देती है, तो विजय के पास भारी बहुमत होगा।
- छोटी पार्टियों का गठबंधन: VCK और लेफ्ट पार्टियों के कुछ विधायक भी विजय के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: तमिलनाडु में बदलाव की बयार
तमिलनाडु की जनता ने इस बार स्पष्ट संदेश दिया है कि वे बदलाव चाहते हैं। थलपति विजय का ‘सिनेमैटिक करिश्मा’ अब ‘पॉलिटिकल पावर’ में बदल चुका है। यदि विजय बहुमत साबित करने में सफल रहते हैं, तो वे तमिलनाडु के इतिहास के पहले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जिन्होंने DMK और AIADMK के 60 साल पुराने किलों को ध्वस्त किया है।
आने वाले 48 घंटे राज्य की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। क्या विजय 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।
