तमिलनाडु की सियासत में सीएम विजय की पहली बड़ी अग्निपरीक्षा: क्या मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव में डीएमके बिगाड़ेगी टीवीके का खेल?
तमिलनाडु की सियासत में सीएम विजय की पहली बड़ी अग्निपरीक्षा: क्या मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव में डीएमके बिगाड़ेगी टीवीके का खेल?
तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही हलचल तेज है। राज्य में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे अभिनेता से राजनेता बने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) अब अपनी पहली चुनावी परीक्षा का सामना करने जा रही है। सत्ता संभाले 100 से अधिक दिन पूरे होने के बाद, निर्वाचन आयोग द्वारा मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है।
यह उपचुनाव केवल दो रिक्त सीटों को भरने की कवायद नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री विजय के 100 दिनों के शासन, उनकी नीतियों और जनता के बीच टीवीके की स्वीकार्यता पर पहला सीधा जनमत संग्रह माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या द्रविड़ राजनीति के दिग्गज दल—द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK)—विजय के इस विजय रथ को रोक पाएंगे या टीवीके अपने दम पर पूर्ण बहुमत की ओर कदम बढ़ाएगी?
उपचुनाव की तारीखें और चुनावी समीकरण
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार:
- मतदान की तारीख: 6 अक्टूबर
- मतगणना की तारीख: 9 अक्टूबर
तमिलनाडु विधानसभा में इस समय कुल 7 सीटें खाली हैं। हालांकि, चुनाव केवल दो सीटों—मदुरंतकम और धारापुरम—पर कराए जा रहे हैं। शेष पांच सीटों (तिरुचि पूर्व, अंबासमुद्रम, विरालिमलाई, पेरुंदुरई और करूर) पर चुनाव संबंधी कानूनी मामले अदालतों में लंबित होने के कारण मतदान की घोषणा नहीं की गई है।
इन दोनों सीटों का इतिहास और हालिया घटनाक्रम बेहद दिलचस्प है। आम विधानसभा चुनावों में ये दोनों सीटें एआईएडीएमके के खाते में गई थीं:
- धारापुरम सीट: यहां से एआईएडीएमके की सत्यभामा ने जीत हासिल की थी।
- मदुरंतकम सीट: इस सीट का प्रतिनिधित्व एआईएडीएमके की वरिष्ठ नेता मरथगम कुमारवेल कर रही थीं।
हालांकि, सत्ता समीकरण बदलते ही इन दोनों महिला विधायकों ने 26 मई को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर टीवीके का दामन थाम लिया। विधायकों के इस्तीफे के कारण ही ये दोनों सीटें रिक्त हुईं और अब यहां उपचुनाव की नौबत आई है।
टीवीके की रणनीति: गठबंधन की निर्भरता खत्म कर पूर्ण बहुमत पाना
मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के लिए यह उपचुनाव राजनीतिक अस्तित्व और स्थिरता का प्रश्न है। चुनाव जीतकर सत्ता में आने के बावजूद, टीवीके विधानसभा में अपने दम पर जादुई आंकड़े से अभी भी 10 सीटें पीछे है। सरकार चलाने के लिए पार्टी को सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ऐसे में टीवीके का स्पष्ट रणनीतिक रोडमैप है:
- सभी उपचुनावों में जीत दर्ज करना: पार्टी हर रिक्त सीट पर जीत हासिल कर गठबंधन के दबाव और बैसाखियों से मुक्त होना चाहती है।
- 100 दिनों के काम पर मुहर लगवाना: टीवीके इन उपचुनावों को अपनी सरकार के 100 दिनों के कामकाज पर जनता के अनुमोदन (Vote of Approval) के रूप में देख रही है।
- कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार: पार्टी का मानना है कि भ्रष्टाचार विरोधी कड़े कदम, चुनावी वादों को समय पर पूरा करना और जनहितैषी योजनाओं की शुरुआत मतदाताओं को टीवीके के पक्ष में एकजुट करेगी।
पिछला चुनावी प्रदर्शन: आंकड़े टीवीके के लिए चुनौतीपूर्ण
कागजों पर आंकड़े बताते हैं कि आम चुनाव में इन दोनों सीटों पर टीवीके का प्रदर्शन उत्साहजनक नहीं रहा था:
- धारापुरम: आम चुनाव में टीवीके की प्रत्याशी गौरी चित्रा 34,662 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थीं।
- मदुरंतकम: टीवीके उम्मीदवार एजिल कैथरीन एजिलमलाई को मात्र 7,194 वोट मिले थे और वे दूसरे स्थान पर रही थीं।
हालांकि, अब समीकरण पूरी तरह पलट चुके हैं। जिन नेताओं ने एआईएडीएमके के टिकट पर इन सीटों से जीत हासिल की थी, वे अब खुद टीवीके के खेमे में हैं। राजनीतिक गलियारों में यह प्रबल चर्चा है कि मरथगम कुमारवेल, जिन्हें टीवीके में उप महासचिव (Deputy General Secretary) की अहम जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें मदुरंतकम से पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार बनाया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले इन नेताओं की मौजूदगी से टीवीके को अपनी पुरानी कमजोरी दूर होने की पूरी उम्मीद है।
एआईएडीएमके के सामने अस्तित्व की लड़ाई
मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके के लिए यह उपचुनाव किसी दोधारी तलवार से कम नहीं है। अपने ही विधायकों द्वारा पाला बदलने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के लिए इन दोनों सीटों को वापस जीतना प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है।
पार्टी के भीतर पहले से ही आंतरिक कलह और गुटबाजी की खबरें आम हैं। यदि एआईएडीएमके अपनी ये दोनों पारंपरिक सीटें दोबारा नहीं जीत पाती है, तो यह ईपीएस के नेतृत्व के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित होगा। इससे पार्टी के भीतर उनके विरोधियों को आवाज उठाने का मौका मिलेगा और कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाएगा कि कैडर पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को जनता का समर्थन मिल रहा है।
डीएमके का मास्टरप्लान: क्या वॉकओवर देगी या बिगाड़ेगी खेल?
दूसरी ओर, राज्य की सत्ता से बाहर हुई डीएमके भी इस मुकाबले को बेहद गंभीरता से ले रही है। डीएमके के लिए यह साबित करना जरूरी है कि उसका कोर वोट बैंक अभी भी पूरी तरह एकजुट है।
हालांकि, सियासी रणनीतिकारों का मानना है कि यदि मुकाबला त्रिकोणीय (TVK बनाम AIADMK बनाम DMK) होता है, तो विपक्ष के वोटों में भारी बिखराव हो सकता है। वोटों का यह विभाजन सीधे तौर पर सत्ताधारी टीवीके के पक्ष में जा सकता है। राजनीतिक हलकों में यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि क्या डीएमके वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए कोई चौंकाने वाला कदम उठाएगी या आक्रामक प्रचार के जरिए दोनों प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़कर अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश करेगी।
6 अक्टूबर को तय होगा तमिलनाडु का सियासी भविष्य
मदुरंतकम और धारापुरम के उपचुनाव तमिलनाडु की राजनीति के आगामी पांच वर्षों की दिशा तय करने वाले हैं। यदि मुख्यमंत्री विजय दोनों सीटों पर जीत का परचम लहराते हैं, तो इससे न केवल विधानसभा में टीवीके की स्थिति मजबूत होगी, बल्कि राज्य में परंपरागत द्रविड़ दलों के वर्चस्व को गहरा आघात पहुंचेगा।
इसके विपरीत, यदि विपक्षी दल किसी भी सीट पर उलटफेर करने में सफल रहते हैं, तो यह विजय सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी होगी कि चुनावी उत्साह और वास्तविक शासन के बीच का अंतर जनता बहुत बारीकी से देख रही है। 9 अक्टूबर को जब मतगणना होगी, तब साफ हो जाएगा कि जनता ने विजय के 100 दिनों के रिपोर्ट कार्ड को स्वीकारा है या द्रविड़ राजनीति के दिग्गजों की रणनीति भारी पड़ी है।
