नाना पाटेकर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा: जानें हृदय की मुख्य धमनी में ‘ब्लड क्लॉट’ (Blood Clot) कैसे बन जाता है जानलेवा
नाना पाटेकर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा: जानें हृदय की मुख्य धमनी में 'ब्लड क्लॉट' (Blood Clot) कैसे बन जाता है जानलेवा
भारतीय सिनेमा जगत और लाखों प्रशंसकों को गहरा सदमा देने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है। अपनी दमदार आवाज, यथार्थवादी अभिनय और ‘क्रांतिवीर’, ‘खामोशी’ तथा ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए पहचाने जाने वाले 75 वर्षीय अभिनेता का 8 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया था। शुरुआत में इसे एक आकस्मिक कार्डियक अरेस्ट माना जा रहा था, लेकिन अब गोवा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) द्वारा जारी की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उनकी अचानक मौत का विस्तृत चिकित्सा कारण स्पष्ट कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, नाना पाटेकर का निधन प्राकृतिक कारणों से हुआ है। मेडिकल शब्दावली में मौत का कारण “एथेरोस्क्लेरोटिक ऑक्लूसिव कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी थ्रोम्बोसिस और इसके परिणामस्वरूप एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन” (acute myocardial infarction due to left main coronary artery thrombosis secondary to atherosclerotic occlusive coronary artery disease) बताया गया है। आसान भाषा में कहें तो, अभिनेता को एक बेहद गंभीर और जानलेवा हार्ट अटैक आया था, जो हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली सबसे महत्वपूर्ण धमनी (Left Main Coronary Artery) में अचानक खून का थक्का (Blood Clot) जमने के कारण हुआ।
हृदय का दौरा और लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी (LMCA) की भूमिका
इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट की गंभीरता को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि हमारा हृदय कैसे काम करता है और उसे रक्त कैसे मिलता है। हृदय एक मांसपेशी है जो पूरे शरीर में रक्त पंप करती है, लेकिन इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए हृदय को भी ऑक्सीजन युक्त रक्त की आवश्यकता होती है। यह आपूर्ति कोरोनरी धमनियों (coronary arteries) के माध्यम से होती है।
लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी (LMCA) हृदय की सबसे महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं में से एक है। यह महाधमनी (aorta) से निकलती है और हृदय के बाएं हिस्से (बाएं वेंट्रिकल और बाएं आलिंद) को ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाती है। हृदय का यह हिस्सा पूरे शरीर में रक्त पंप करने का सबसे भारी काम करता है। चिकित्सा विशेषज्ञ अक्सर इस धमनी में होने वाले गंभीर ब्लॉकेज को “विडो-मेकर” (widow-maker) कहते हैं, क्योंकि यह हृदय की लगभग 60 से 70 प्रतिशत मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति काट देता है।
जब यह धमनी अचानक ब्लॉक हो जाती है—जैसा कि नाना पाटेकर के मामले में हुआ—तो हृदय की मांसपेशियों को तुरंत ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। कुछ ही मिनटों के भीतर, प्रभावित हिस्से की कोशिकाएं मरने लगती हैं, जिसे ‘एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन’ (गंभीर हार्ट अटैक) कहा जाता है। रक्त प्रवाह के अचानक रुकने से हृदय की लय (rhythm) बुरी तरह बिगड़ जाती है, जिससे सडन कार्डियक अरेस्ट (sudden cardiac arrest) होता है। ऐसी स्थिति में मरीज की जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
एथेरोस्क्लेरोसिस और थ्रोम्बोसिस: कैसे बना यह जानलेवा थक्का?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि थ्रोम्बोसिस (खून का थक्का) “एथेरोस्क्लेरोटिक ऑक्लूसिव कोरोनरी आर्टरी डिजीज” का परिणाम था। यह इस बात का संकेत है कि यह जानलेवा घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे हृदय की एक पुरानी और गंभीर बीमारी थी जो समय के साथ विकसित हो रही थी।
एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) एक ऐसी स्थिति है जिसमें धमनियों की भीतरी दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल, वसा (fat) और अन्य पदार्थ जमा होने लगते हैं। इस जमाव को ‘प्लाक’ (plaque) कहा जाता है। समय के साथ, यह प्लाक सख्त हो जाता है और धमनियों को संकरा कर देता है, जिससे रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है। प्लाक का जमा होना अपने आप में खतरनाक है, लेकिन सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है जब यह प्लाक अचानक फट (rupture) जाता है।
जब प्लाक फटता है, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इसे एक चोट के रूप में देखती है। इस ‘चोट’ को ठीक करने के लिए रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स तुरंत उस जगह पर इकट्ठा होने लगते हैं, जिससे वहां खून का थक्का (blood clot) बन जाता है। पहले से ही संकरी हो चुकी धमनी में यह थक्का तेजी से बड़ा हो सकता है और रक्त के प्रवाह को पूरी तरह से रोक सकता है। नाना पाटेकर के मामले में यही विनाशकारी प्रक्रिया लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी में हुई, जिससे हृदय को खून मिलना एकदम बंद हो गया और यह घातक साबित हुआ।
गोवा में उनके जीवन के अंतिम कुछ घंटे
घटनाक्रम से पता चलता है कि यह हमला कितना अचानक और गंभीर था। नाना पाटेकर 8 अक्टूबर की तड़के पणजी के पास डोना पाउला (Dona Paula) स्थित अपने आवास पर थे। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, अभिनेता के केयरटेकर ने सुबह-सुबह पास के एक निजी अस्पताल में फोन करके तत्काल एंबुलेंस की मांग की थी। केयरटेकर ने बताया था कि अभिनेता को बहुत घबराहट और बेचैनी हो रही है।
अस्पताल से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित उनके अपार्टमेंट में तुरंत एंबुलेंस भेजी गई। लेकिन जब तक उन्हें अस्पताल के आपातकालीन कक्ष (Emergency Room) में लाया गया, उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी। डॉक्टरों की एक टीम ने तुरंत आपातकालीन प्रोटोकॉल शुरू किया। लगभग 45 मिनट तक लगातार कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) देने और हर संभव प्रयास करने के बावजूद, दिग्गज अभिनेता के हृदय की धड़कन वापस नहीं लाई जा सकी। सुबह 5:10 बजे उन्हें आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया गया। मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए शव को गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया था।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई और एक अमर विरासत
पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद, नाना पाटेकर के बेटे मल्हार उनके पार्थिव शरीर को लेने गोवा पहुंचे। उनके शव को विशेष विमान से पुणे ले जाया गया और वहां से डोन्जे गांव (Donje village) स्थित उनके पसंदीदा फार्महाउस पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसी फार्महाउस के शांत वातावरण में, जिसे वे बेहद प्यार करते थे, पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
उनकी अंतिम विदाई में शोक संतप्त प्रशंसकों, स्थानीय ग्रामीणों और कई प्रमुख हस्तियों की भारी भीड़ उमड़ी। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और जैकी श्रॉफ तथा मकरंद अनासपुरे जैसे बॉलीवुड सितारों ने इस महान अभिनेता को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
नाना पाटेकर भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा नाम छोड़ गए हैं जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। पर्दे पर उनके दमदार संवाद, समाज के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता और विशेष रूप से ‘नाम फाउंडेशन’ (NAAM Foundation) के जरिए सूखाग्रस्त किसानों की मदद के लिए किए गए उनके निस्वार्थ कार्यों ने उन्हें एक नायक बना दिया था। उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का यह खुलासा न केवल उनके निधन से जुड़े सवालों के जवाब देता है, बल्कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी खामोश और जानलेवा बीमारी के प्रति भी समाज को जागरूक करता है।
