राघव चड्ढा ने थामा भाजपा का दामन: बोले- ‘मैं गलत पार्टी में सही आदमी था’, AAP को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका

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राघव चड्ढा ने थामा भाजपा का दामन: बोले- 'मैं गलत पार्टी में सही आदमी था', AAP को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका

राघव चड्ढा ने थामा भाजपा का दामन: बोले- 'मैं गलत पार्टी में सही आदमी था', AAP को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका

Raghav Chadha Joins BJP Updates: भारतीय राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के ‘पोस्टर बॉय’ और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। उनके साथ 6 अन्य राज्यसभा सांसदों ने भी पाला बदला है, जिससे अरविंद केजरीवाल की पार्टी को संसद के उच्च सदन में अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने अपने इस कदम को ‘सिद्धांतों की लड़ाई’ बताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मुझे लंबे समय से महसूस हो रहा था कि मैं एक गलत पार्टी में सही इंसान (Right Man in the Wrong Party) हूँ।”


मुख्य बातें:

  • बड़ी बगावत: राघव चड्ढा सहित 7 राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल।
  • संविधान का दांव: दलबदल कानून से बचने के लिए 2/3 सांसदों का ‘विलय’ (Merger)।
  • बड़ा आरोप: चड्ढा ने कहा- AAP अपने मूल सिद्धांतों और नैतिकता से पूरी तरह भटक चुकी है।
  • प्रमुख नाम: हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल और संदीप पाठक भी भाजपा में शामिल।

क्यों टूटी 15 साल पुरानी दोस्ती?

राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत से ही अरविंद केजरीवाल का साथ दिया। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ती जा रही थीं।

चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैंने अपने खून-पसीने से इस पार्टी को सींचा और अपनी जवानी के 15 साल इसे दिए। लेकिन आज यह पार्टी राष्ट्रहित के बजाय निजी हितों और भ्रष्टाचार के दलदल में फंस गई है। मैं उनके पापों का हिस्सा नहीं बनना चाहता था।”

मास्टरस्ट्रोक: दलबदल कानून को दी मात

राघव चड्ढा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के साथ-साथ राजनीति के माहिर खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने अकेले इस्तीफा देने के बजाय राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसदों में से 7 को अपने साथ मिलाया। संविधान की 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) विधायक या सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में जाते हैं, तो उसे ‘विलय’ माना जाता है और उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती।

भाजपा में शामिल होने वाले सांसद:

  1. राघव चड्ढा
  2. हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
  3. स्वाति मालीवाल (पूर्व DCW अध्यक्ष)
  4. संदीप पाठक (राष्ट्रीय संगठन सचिव)
  5. अशोक मित्तल
  6. राजिंदर गुप्ता
  7. विक्रमजीत सिंह साहनी

इस कदम के बाद राज्यसभा में AAP के पास अब केवल 3 सांसद (संजय सिंह, बलबीर सिंह सीचेवाल और एनडी गुप्ता) बचे हैं।

AAP और चड्ढा के बीच ‘शीत युद्ध’ की कहानी

दरार की शुरुआत तब हुई जब करीब तीन हफ्ते पहले AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटा दिया और उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया। पार्टी ने उन पर ‘सॉफ्ट पीआर’ करने और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना न करने के आरोप लगाए थे।

चड्ढा को केंद्र सरकार द्वारा दी गई ‘Z कैटेगरी’ की सुरक्षा ने भी आग में घी का काम किया। AAP नेताओं ने खुलेआम आरोप लगाया कि चड्ढा भाजपा के साथ गुप्त समझौते कर रहे हैं। चड्ढा ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सदन में जनता के मुद्दे उठाए हैं, लेकिन पार्टी उन्हें चुप कराना चाहती थी।

पंजाब की राजनीति पर गहरा असर

भाजपा में शामिल होने वाले 7 सांसदों में से 5 पंजाब से हैं। यह पंजाब की मान सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है। संदीप पाठक, जो पंजाब में AAP की जीत के मुख्य रणनीतिकार थे, और हरभजन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरे का भाजपा में जाना राज्य की सियासत को पूरी तरह बदल सकता है।

भाजपा के लिए क्या हैं मायने?

भाजपा के लिए राघव चड्ढा की एंट्री एक बड़ी जीत है। वे एक युवा, पढ़े-लिखे और मुखर नेता हैं जिनकी शहरी मतदाताओं के बीच अच्छी पकड़ है। भाजपा उन्हें दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में एक प्रमुख चेहरे के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।

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