मास्क पहने चेहरे, बदले हुए कपड़े और एक लाल बैग: सीसीटीवी फुटेज ने कैसे सुलझाई दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर की हत्या की गुत्थी

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मास्क पहने चेहरे, बदले हुए कपड़े और एक लाल बैग: सीसीटीवी फुटेज ने कैसे सुलझाई दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर की हत्या की गुत्थी

मास्क पहने चेहरे, बदले हुए कपड़े और एक लाल बैग: सीसीटीवी फुटेज ने कैसे सुलझाई दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर की हत्या की गुत्थी

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) की एक असिस्टेंट प्रोफेसर की उनके ही फ्लैट में बेरहमी से की गई हत्या ने पूरे शिक्षा जगत और स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन अपराधियों की कोई भी चालाकी कानून की पैनी नजरों से बच नहीं सकी। सीसीटीवी कैमरों की बारीक जांच और दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी ने इस हत्याकांड का महज कुछ ही दिनों में पर्दाफाश कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने पश्चिम बंगाल के बर्दवान से एक ही परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पति, पत्नी और उनका 13 वर्षीय नाबालिग बेटा शामिल है।

यह पूरी घटना केवल एक कत्ल की नहीं है, बल्कि यह लालच, धोखे और पारिवारिक संपत्ति के विवाद की एक खौफनाक दास्तान है। आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए शातिर अपराधियों की तरह एक पूरी योजना बनाई थी—कपड़े बदले, चेहरे पर मास्क लगाया और दिल्ली से भागने के लिए अलग-अलग सार्वजनिक यातायात के साधनों का इस्तेमाल किया।

शव की बरामदगी और शुरुआती जांच यह खौफनाक वाकया 3 जून 2026 को सामने आया। पूर्वी दिल्ली के पॉश इलाके वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सत्यम अपार्टमेंट की छठी मंजिल पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिवाजी कॉलेज में अंग्रेजी की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल मृत अवस्था में पाई गईं। देबोस्मिता अपनी दिनचर्या की बहुत पक्की थीं। जब उनके पड़ोसियों और सहयोगियों ने देखा कि वह फोन कॉल और टेक्स्ट मैसेज का कोई जवाब नहीं दे रही हैं, तो उन्हें किसी अनहोनी का शक हुआ। इसके बाद जब फ्लैट का दरवाजा खोला गया, तो अंदर का नजारा खौफनाक था। प्रोफेसर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा था।

पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद फोरेंसिक और हत्या की जांच शुरू हुई। चूंकि फ्लैट में जबरन घुसने (forced entry) या दरवाजा तोड़े जाने के कोई निशान मौजूद नहीं थे, इसलिए पुलिस का पहला शक इसी बात पर गया कि कातिल कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे मृतका अच्छे से जानती थीं और जिसने आसानी से उनके घर में प्रवेश किया होगा। इसके बाद पुलिस का पूरा ध्यान हाउसिंग सोसाइटी के एंट्री-एग्जिट रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज को खंगालने पर केंद्रित हो गया।

सीसीटीवी फुटेज ने खोली कातिलों की पोल इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में सबसे बड़ी भूमिका सत्यम अपार्टमेंट के सीसीटीवी कैमरों ने निभाई। वरिष्ठ जांच अधिकारियों के अनुसार, घटना वाले दिन कैमरों के नेटवर्क में कुछ बेहद असामान्य और संदिग्ध गतिविधियां रिकॉर्ड हुईं।

सीढ़ियों के पास लगे पहले कैमरे की फुटेज में तीन लोग (आरोपी परिवार) एक साथ ऊपर की मंजिलों की तरफ जाते हुए दिखाई दिए। पुलिस की नजरों और कैमरों से बचने के लिए तीनों ने अपने चेहरों पर सर्जिकल मास्क लगाए हुए थे। 42 वर्षीय आरोपी रामप्रसाद दास के हाथ में एक लाल रंग का बैग भी स्पष्ट रूप से देखा गया। पुलिस का मानना है कि इसी बैग में अपराध को अंजाम देने वाले हथियार या फ्लैट से चुराए गए अन्य सामान रखे गए थे।

लेकिन कातिलों की यह होशियारी ज्यादा देर तक काम नहीं आई। हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के दूसरे हिस्से में, लिफ्ट के पास लगे एक अन्य कैमरे ने उनकी इस चालाकी की पूरी पोल खोल दी। दूसरी फुटेज में जब यह परिवार लिफ्ट से बाहर निकल रहा था, तब केवल रामप्रसाद ने ही चेहरे पर मास्क पहना हुआ था। उसकी 36 वर्षीय पत्नी बनश्री दास और उनके किशोर बेटे का चेहरा पूरी तरह से कैमरे की लेंस के सामने बेनकाब हो चुका था।

साइबर और फोरेंसिक टीम के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने अपने कपड़े बदल लिए थे। शुरुआती फुटेज में रामप्रसाद एक सफेद शर्ट में और उसकी पत्नी बनश्री काले और सफेद रंग की सलवार-कमीज में नजर आ रही थीं। लेकिन जब वे लिफ्ट के पास नजर आए, तब तक रामप्रसाद ने चमकीले लाल रंग की शर्ट पहन ली थी और बनश्री भी लाल रंग की सलवार-कमीज में दिखाई दी। जांचकर्ताओं का कहना है कि कपड़ों का यह बदलाव मुख्य द्वार पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड्स और आस-पास के लोगों को चकमा देने के लिए एक सोची-समझी चाल थी।

हत्या की असली वजह: पुश्तैनी संपत्ति का लालच पुलिस की गहन पूछताछ और तफ्तीश में हत्या का जो असली कारण सामने आया, वह संपत्ति का लालच और पारिवारिक कलह था। जांच में पता चला कि आरोपी परिवार पश्चिम बंगाल के बर्दवान में प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल की एक बेशकीमती पुश्तैनी संपत्ति पर साल 2023 से अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठा था।

एक औपचारिक पारिवारिक समझौते के तहत वह संपत्ति कानूनी रूप से असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता को आवंटित की गई थी। लगभग तीन सालों से देबोस्मिता लगातार रामप्रसाद और उसके परिवार से वह घर खाली करने की मांग कर रही थीं, ताकि वह अपनी संपत्ति पर पूर्ण रूप से अपना अधिकार पा सकें। लेकिन आरोपी परिवार ने घर खाली करने से हमेशा इनकार किया, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच एक लंबा और कड़वा विवाद चल रहा था।

सूत्रों के अनुसार, मामला पिछले महीने तब और बिगड़ गया जब देबोस्मिता पॉल खुद पश्चिम बंगाल गईं। वहां उन्होंने आरोपी परिवार को अंतिम और सख्त कानूनी चेतावनी दी कि अगर उन्होंने तुरंत घर की चाबियां नहीं सौंपीं, तो वह उन्हें घर से बाहर निकालने की कानूनी प्रक्रिया (eviction) शुरू कर देंगी। अपनी अवैध कब्जे वाली इस मूल्यवान संपत्ति को हाथ से जाता देख, परिवार ने एक खौफनाक साजिश रची। उन्होंने दिल्ली की यात्रा करके प्रोफेसर को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का फैसला किया। उनका मानना था कि प्रोफेसर की मौत के साथ ही संपत्ति खाली करने की धमकियां और कानूनी विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

फरार होने की सुनियोजित साजिश और बंगाल से गिरफ्तारी 3 जून को देबोस्मिता की उनके फ्लैट में हत्या करने के बाद, आरोपियों ने तेजी से भागने की योजना पर अमल किया। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से बचने के लिए उन्होंने ऐप-आधारित (ओला-उबर) कैब बुक नहीं की। इसके बजाय वे पैदल ही अपार्टमेंट से बाहर निकले और एक स्थानीय टैक्सी लेकर कुछ किलोमीटर दूर तक गए।

वहां से उन्होंने आनंद विहार बस अड्डे तक पहुंचने के लिए एक पब्लिक ऑटो-रिक्शा लिया। राज्य से जल्द से जल्द बाहर निकलने की फिराक में वे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) पहुंचे, जहां से उन्होंने टिकट खरीदे और पश्चिम बंगाल वापस जाने के लिए पूर्वा एक्सप्रेस में सवार हो गए।

उन्होंने भीड़ में छिपने की पूरी कोशिश की, लेकिन अपार्टमेंट के कैमरों में कैद हुए उनके बदले हुए कपड़े और रेलवे मार्ग के आसपास डिजिटल सर्विलांस ने दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस टीम को उनके भागने का सटीक रास्ता (escape vector) तैयार करने में मदद की। पश्चिम बंगाल की स्थानीय पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीब से समन्वय करते हुए, दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम ने बर्दवान में उनके ठिकाने का पता लगा लिया और छापा मारा।

7 जून 2026 को परिवार के तीनों सदस्यों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। पति-पत्नी को आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है, जबकि उनके 13 वर्षीय बेटे के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मामले की निगरानी कर रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “सीसीटीवी फुटेज ने हमें वह अकाट्य सुराग दिया जिसकी हमें तलाश थी। आरोपियों को लगा कि कपड़े बदलने और मास्क लगाने से वे अपने गुनाह को छिपा लेंगे, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों ने उन्हें पूरी तरह से बेनकाब कर दिया। हम फिलहाल भौतिक साक्ष्य जुटा रहे हैं, जिनमें वारदात के वक्त पहने गए कपड़े और फुटेज में दिखा लाल बैग शामिल है।”

इस दर्दनाक घटना से शिवाजी कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय का पूरा शैक्षणिक समुदाय गहरे सदमे में है। छात्रों और शिक्षकों ने अपनी सहयोगी के इस तरह चले जाने पर दुख व्यक्त करते हुए अपराधियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है। आगे की कानूनी कार्यवाही और क्राइम सीन का फोरेंसिक विश्लेषण अभी भी जारी है।

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