खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए ईरान ने पीएम मोदी को भेजा न्यौता, 4 जुलाई से शुरू होगी 6 दिनों की प्रक्रिया; असमंजस में भारत

0
खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए ईरान ने पीएम मोदी को भेजा न्यौता, 4 जुलाई से शुरू होगी 6 दिनों की प्रक्रिया; असमंजस में भारत

खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए ईरान ने पीएम मोदी को भेजा न्यौता, 4 जुलाई से शुरू होगी 6 दिनों की प्रक्रिया; असमंजस में भारत

नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे तनाव और युद्ध के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के राजकीय अंतिम संस्कार (State Funeral) और दफनाने की रस्मों में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है।

अयातुल्ला अली खामेनेई की इसी साल 28 फरवरी (2026) को अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान में किए गए संयुक्त हवाई हमलों में मौत हो गई थी। युद्ध के हालात और सुरक्षा कारणों से उनका अंतिम संस्कार कई महीनों तक टलता रहा, लेकिन अब ईरान सरकार ने 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच 6 दिवसीय राजकीय शोक और अंतिम संस्कार की घोषणा की है।

भारत के लिए यह निमंत्रण एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा साबित हो सकता है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है कि पीएम मोदी इस आयोजन में शामिल होंगे या नहीं। भारत के सामने ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को बनाए रखने के साथ-साथ अमेरिका और इजरायल जैसे प्रमुख सहयोगियों के साथ संतुलन साधने की चुनौती है।

महीनों बाद क्यों हो रहा है अंतिम संस्कार?

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद शव को जल्द से जल्द, आमतौर पर 24 घंटे के भीतर दफना दिया जाता है। हालांकि, युद्ध या विशेष परिस्थितियों में अपवाद की अनुमति है।

86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी, जब उनके आवास पर हवाई हमला हुआ था। इस हमले में उनकी बेटी, दामाद और पोते की भी जान चली गई थी। शुरुआत में अंतिम संस्कार मार्च में ही प्रस्तावित था, लेकिन ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के कारण इसे बार-बार टालना पड़ा।

अब जबकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और समझौते की खबरें आ रही हैं (हाल ही में 17 जून को एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं), ईरान सरकार ने खामेनेई के अंतिम संस्कार को बड़े पैमाने पर आयोजित करने का निर्णय लिया है। उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने 8 मार्च को सुप्रीम लीडर का पदभार संभाला था।

6 दिनों तक चलेगा कार्यक्रम: तेहरान से मशहद तक (Tehran, Qom, Mashhad)

ईरान ने इस अंतिम संस्कार को अभूतपूर्व पैमाने पर आयोजित करने की तैयारी की है। ईरानी अधिकारियों और स्टेट मीडिया (IRIB) के अनुसार, 4 जुलाई से 9 जुलाई तक देश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दौरान करीब 2 करोड़ (20 मिलियन) लोगों के जुटने का अनुमान है।

  • तेहरान (Tehran): 4 और 5 जुलाई को खामेनेई का पार्थिव शरीर आम जनता के दर्शन के लिए तेहरान की ‘ग्रैंड मुसल्ला’ (Grand Mosalla) में रखा जाएगा। 6 जुलाई को तेहरान की सड़कों पर एक विशाल अंतिम विदाई यात्रा (Funeral Procession) निकाली जाएगी। इसके लिए राजधानी तेहरान में तीन दिन (4 से 6 जुलाई) का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
  • कोम (Qom): 7 जुलाई को पार्थिव शरीर को शिया धर्मगुरुओं के मजबूत गढ़ और पवित्र शहर ‘कोम’ ले जाया जाएगा, जहां विशेष प्रार्थनाएं और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित होंगी।
  • मशहद (Mashhad): अंतिम संस्कार की प्रक्रिया का समापन 9 जुलाई को होगा। खामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद में ‘इमाम रजा श्राइन’ (Imam Reza Shrine) में सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया जाएगा। इसे शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।

भारत की कूटनीतिक दुविधा (India’s Diplomatic Dilemma)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया निमंत्रण भारत के लिए एक नाजुक स्थिति पैदा करता है। विदेश मंत्रालय (MEA) फिलहाल इस निमंत्रण का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रहा है।

ईरान के साथ भारत के संबंध: भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत ऐतिहासिक और ऊर्जा संबंध रहे हैं। चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) जैसी रणनीतिक परियोजनाएं दोनों देशों के बीच सहयोग का प्रतीक हैं। खामेनेई की मृत्यु पर भी भारत ने आधिकारिक रूप से शोक व्यक्त किया था, और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अपने ईरानी समकक्ष से बात की थी।

अमेरिका और इजरायल फैक्टर: दूसरी ओर, खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान में हुई थी। भारत के इन दोनों ही देशों के साथ अत्यंत मजबूत आर्थिक, रक्षा और रणनीतिक संबंध हैं। पीएम मोदी का इस अंतिम संस्कार में शामिल होना अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई तरह के राजनीतिक संदेश दे सकता है। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका कोई भी कदम वैश्विक गुटबाजी का हिस्सा न लगे।

आगे क्या?

ईरानी दूतावास द्वारा मंगलवार को नई दिल्ली में भेजे गए निमंत्रण के बाद, अब सबकी निगाहें विदेश मंत्रालय (MEA) पर टिकी हैं। अगर प्रधानमंत्री मोदी स्वयं नहीं जाते हैं, तो क्या भारत की ओर से कोई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री या उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ईरान भेजा जाएगा?

इस बीच, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को एक एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों से कहा है कि वे बहुत जरूरी न होने पर ईरान की यात्रा करने से बचें। दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीयों से सुरक्षा हालात को देखते हुए अत्यधिक सतर्कता बरतने की अपील की है।

खामेनेई का अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह ईरान के लिए अपने शक्ति प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने का एक बड़ा राजनीतिक मंच भी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस कार्यक्रम में शामिल होने की पुष्टि पहले ही हो चुकी है। अब देखना यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, भारत, इस जटिल कूटनीतिक बिसात पर अपनी चाल कैसे चलता है।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed