शिवसेना (UBT) में एक और बड़ी बगावत की अटकलें तेज, ‘ऑपरेशन टाइगर’ के साये में उद्धव ठाकरे; क्या फिर टूटेगी पार्टी
शिवसेना (UBT) में एक और बड़ी बगावत की अटकलें तेज, 'ऑपरेशन टाइगर' के साये में उद्धव ठाकरे; क्या फिर टूटेगी पार्टी
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे – UBT) पर एक और बड़े विभाजन का खतरा मंडरा रहा है। राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ (Operation Tiger) की चर्चा जोरों पर है, जिसके तहत दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 6 से 7 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (सत्तारूढ़ गुट) में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। इस सियासी संकट और दल-बदल की अटकलों के बीच, उद्धव गुट अलर्ट मोड में आ गया है।
पार्टी को टूटने से बचाने और संभावित बागियों पर नकेल कसने के लिए शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है। बुधवार, 17 जून 2026 को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं—संजय राउत, अरविंद सावंत और अनिल देसाई—ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उनसे दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) का सख्ती से पालन करने की गुहार लगाई। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर ‘ऑपरेशन टाइगर’ क्या है और महाराष्ट्र की सियासत किस दिशा में जा रही है।
लोकसभा स्पीकर से मिले UBT नेता, सौंपी कैविएट
बगावत की तेज होती चर्चाओं के बीच, शिवसेना (UBT) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से संसद भवन में मुलाकात की। सांसदों ने स्पीकर को एक औपचारिक पत्र (कैविएट) सौंपा है। इस पत्र में यह मांग की गई है कि यदि सांसदों का कोई भी बागी गुट पार्टी तोड़ने, अलग गुट के रूप में मान्यता मांगने या किसी अन्य पार्टी में विलय के लिए उनके पास आता है, तो कोई भी फैसला लेने से पहले शिवसेना (UBT) का पक्ष जरूर सुना जाए।
सांसद अरविंद सावंत ने बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “हमने स्पीकर महोदय को अवगत कराया है कि जो खबरें मीडिया में आ रही हैं, उनकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी सांसद ने हमें छोड़ने की बात नहीं कही है। लेकिन अगर कोई गुट उनके पास आता है, तो संविधान और दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) का सख्ती से पालन होना चाहिए।”
वहीं, अनिल देसाई ने संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि कानून के तहत केवल दो-तिहाई बहुमत (Two-Thirds Majority) होना ही काफी नहीं है। विलय की मान्यता तभी दी जा सकती है जब मूल राजनीतिक दल का विलय हो रहा हो। केवल कुछ सांसदों का समूह किसी अन्य पार्टी में सीधे तौर पर विलय नहीं कर सकता। संजय राउत ने भी संतोष जताते हुए कहा कि स्पीकर ने उन्हें न्याय का आश्वासन दिया है और भरोसा दिलाया है कि कोई भी निर्णय नियमों और कानूनी प्रावधानों के दायरे में ही लिया जाएगा। यदि स्पीकर उनकी बात नहीं मानते हैं, तो पार्टी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए भी तैयार है।
18 जून के लिए व्हिप जारी, दिल्ली में अहम बैठक
सांसदों को एकजुट रखने और किसी भी संभावित टूट को रोकने के लिए, शिवसेना (UBT) के लोकसभा मुख्य सचेतक (Chief Whip) अनिल देसाई ने एक सख्त व्हिप जारी किया है। इस सर्कुलर के जरिए पार्टी के सभी 9 लोकसभा सांसदों को 18 जून 2026 (गुरुवार) को सुबह 11 बजे नई दिल्ली के संसद भवन स्थित पार्टी कार्यालय (128-A, संविधान सदन) में होने वाली संसदीय दल की अहम बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
यह बैठक पार्टी के भविष्य और कथित तौर पर अलग होने की योजना बना रहे असंतुष्ट सांसदों के भाग्य का फैसला करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जो सांसद इस बैठक से नदारद रहेंगे, उनके खिलाफ पार्टी दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता (Disqualification) की कार्यवाही शुरू कर सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस व्हिप के बावजूद कितने सांसद दिल्ली की इस बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’ और 50 करोड़ रुपये का आरोप?
महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। सत्ता पक्ष (एकनाथ शिंदे गुट) के नेताओं का दावा है कि उद्धव गुट के कई सांसद और विधायक उनके लगातार संपर्क में हैं। शिंदे गुट के नेता कृपाल तुमाने ने हाल ही में बयान दिया कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ अपने अंतिम चरण में है और महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सब कुछ साफ हो जाएगा।
इन दावों पर तीखा पलटवार करते हुए शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने खरीद-फरोख्त (Horse-trading) के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। राउत ने दिल्ली में दावा किया कि उनकी पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए भारी भरकम रकम की पेशकश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सांसद को खरीदने के लिए “न्यूनतम समर्थन मूल्य” (MSP) 50 करोड़ रुपये तय किया गया है, जिसमें से 15 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर दिए जा रहे हैं। हालांकि, राउत ने यह भी कहा कि उनके सभी 9 सांसद उद्धव ठाकरे के प्रति निष्ठावान हैं। उन्होंने चुनौती दी कि अगर किसी को जाना है तो वह पार्टी से इस्तीफा दे और फिर से जनता के बीच जाकर चुनाव लड़े। “इस बार महाराष्ट्र की जनता खामोश नहीं बैठेगी,” राउत ने चेतावनी दी।
विधायकों को सहेजने के लिए 22 जून को बुलाई गई बैठक
सांसदों के साथ-साथ शिवसेना (UBT) के विधायकों के भी पाला बदलने की अटकलें जोरों पर हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 14 से 15 विधायक भी एकनाथ शिंदे खेमे के संपर्क में हैं। इस खतरे को देखते हुए पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आगामी महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने 22 जून 2026 को मुंबई स्थित नरीमन पॉइंट के पार्टी कार्यालय ‘शिवालय’ में शाम 4 बजे पार्टी के सभी विधायकों (MLAs) और विधान परिषद सदस्यों (MLCs) की एक अनिवार्य बैठक बुलाई है।
हाल ही में उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के नेताओं से साफ तौर पर कह दिया था कि जो लोग जाना चाहते हैं, वे पूरी तरह से स्वतंत्र हैं, लेकिन पीठ में छुरा घोंपने का काम न करें। गौरतलब है कि 2022 में एकनाथ शिंदे द्वारा किए गए बड़े विद्रोह ने शिवसेना को दो फाड़ कर दिया था और महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिरा दी थी। अब अगर लोकसभा सांसद टूटते हैं, तो संसद में शिवसेना (UBT) की संख्या 9 से घटकर 3 रह जाएगी, जिसका सीधा असर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की ताकत पर पड़ेगा और एनडीए (NDA) के नंबरों में इजाफा होगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल देश और महाराष्ट्र की निगाहें 18 जून को दिल्ली में होने वाली सांसदों की बैठक और 22 जून को मुंबई में होने वाली विधायकों की बैठक पर टिकी हैं। क्या उद्धव ठाकरे 2022 के झटके के बाद अपनी पार्टी के बचे हुए कुनबे को एक साथ रखने में कामयाब हो पाएंगे? या फिर महाराष्ट्र की राजनीति एक और बड़े ‘ऑपरेशन टाइगर’ की गवाह बनेगी? आगामी कुछ दिन महाराष्ट्र की सियासत के लिए बेहद उथल-पुथल भरे और निर्णायक साबित होने वाले हैं।
