स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी: हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर पर कौन-कौन सी धाराएं लगीं? जानिए पूरा मामला
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी: हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर पर कौन-कौन सी धाराएं लगीं? जानिए पूरा मामला
सोशल मीडिया पर खुद को ‘सनातनी योद्धा’ और ‘कट्टर हिंदू’ बताने वाले 21 वर्षीय हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया है। अदालत ने आरोपी को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। भारद्वाज की यह गिरफ्तारी एक वायरल पॉडकास्ट क्लिप के बाद मचे भारी सियासी और सामाजिक बवाल के बाद हुई है, जिसमें उसने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दलित व्यक्ति का सिर फोड़ने और उसे साठ टांके लगवाने का सरेआम शेखी बघारते हुए दावा किया था।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पीड़ित की 14 वर्षीय नाबालिग बेटी को ऑनलाइन दुष्कर्म की धमकियां दी गईं और उसकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत कई गैर-जमानती धाराओं में नया मामला भी दर्ज किया है।
मामले के मुख्य बिंदु:
- गिरफ्तारी और रिमांड: फरार होने की कोशिश कर रहे स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने यूपी के बुलंदशहर से पकड़ा और अदालत से एक दिन की पुलिस रिमांड हासिल की।
- पॉक्सो एक्ट में नई एफआईआर: पीड़ित संजय आजाद की 14 साल की बेटी को ऑनलाइन धमकियां और अश्लील सामग्री भेजने के आरोप में पॉक्सो और आईटी एक्ट के तहत अलग से केस दर्ज किया गया।
- एससी/एसटी एक्ट की धाराएं: भारी विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव के बाद पुलिस ने मूल हमले के मामले में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं जोड़ीं।
- चिराग पासवान की शिकायत: आरोपी ने पॉडकास्ट में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को अपना ‘बड़ा भाई’ बताकर राजनीतिक संरक्षण का दावा किया था, जिसके बाद चिराग पासवान ने नाम के दुरुपयोग को लेकर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
स्वतंत्र भारद्वाज पर लगी धाराओं का पूरा ब्योरा
स्वतंत्र भारद्वाज कानूनी शिकंजे में पूरी तरह घिर चुका है। उस पर दिल्ली के संसद मार्ग थाने में दो अलग-अलग एफआईआर के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
| कानून / अधिनियम | संबंधित धाराएं | अपराध की प्रकृति |
| भारतीय न्याय संहिता (BNS) | धारा 115(2) | जानबूझकर साधारण चोट पहुंचाना (जंतर-मंतर पर मारपीट के मामले में दर्ज मूल एफआईआर)। |
| भारतीय न्याय संहिता (BNS) | धारा 126(2) | गलत तरीके से रोकना (रॉन्गफुल रेस्टोरेंट)। |
| एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम | विभिन्न प्रासंगिक धाराएं | अनुसूचित जाति के व्यक्ति (संजय आजाद) के खिलाफ जातिगत हिंसा और अत्याचार करना। |
| पॉक्सो (POCSO) अधिनियम | संबंधित धाराएं | 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म की धमकियां देना। |
| भारतीय न्याय संहिता (BNS) | धारा 351(3), 78 और 79 | आपराधिक धमकी देना, पीछा करना (स्टॉकिंग) और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना। |
| सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम | धारा 67 | इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील और मॉर्फ्ड सामग्री प्रसारित करना। |
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि पीड़ित की नई मेडिकल जांच रिपोर्ट में चोट की गंभीरता की पुष्टि होती है, तो भारद्वाज के खिलाफ हत्या के प्रयास (धारा 307/बीएनएस समकक्ष) की धारा भी जोड़ी जा सकती है।
वायरल पॉडकास्ट जिससे भड़का विवाद
यह पूरा विवाद तब फिर से भड़क उठा जब सोशल मीडिया पर एक पॉडकास्ट का वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज बेहद आक्रामक और बेखौफ अंदाज में 38 वर्षीय संजय आजाद पर हमले की बात कबूल कर रहा था।
उसने वीडियो में कहा कि उसने जंतर-मंतर पर संजय का सिर फोड़ दिया था, जिससे उसे साठ टांके आए थे। उसने हंसते हुए कहा कि यह हमला धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत आता है, लेकिन अपनी ऊंची राजनीतिक पहुंच के चलते वह कानून से बच निकला। उसने खुद को बचाने के लिए कपिल मिश्रा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान जैसे नेताओं के नामों का सहारा लिया।
वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर भारी आक्रोश फैल गया। चिराग पासवान ने तत्काल खुद को भारद्वाज से अलग करते हुए कहा, “किसी आरोपी द्वारा जानलेवा हमले की बात सरेआम कबूलने के बावजूद कार्रवाई न होना गलत मिसाल है। मैंने उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मैं पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना सुनिश्चित करूंगा।”
जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
इस विवाद की जड़ें 23 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ी हैं। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित किया गया था। संजय आजाद अपनी 14 वर्षीय बेटी नीशू आजाद (जो एक छात्र कार्यकर्ता है) के साथ वहां पहुंचे थे।
शुरुआती एफआईआर के मुताबिक, जब संजय वहां मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे, तब स्वतंत्र भारद्वाज और उसके साथियों ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी। बात तू-तू, मैं-मैं से बढ़कर हिंसक झड़प में बदल गई। उस समय दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि सिर पर लगी चोट साधारण थी और यह कड़े (हाथ में पहनने वाले मेटल ब्रेसलेट) से लगी थी। पुलिस ने तब केवल साधारण चोट और रास्ता रोकने की हल्की धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को छोड़ दिया था। दूसरी ओर, संजय आजाद ने आरोप लगाया था कि उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और पुलिस ने शुरुआत में उनकी मेडिकल रिपोर्ट (MLC) दबाने की कोशिश की थी।
नाबालिग छात्रा को ऑनलाइन धमकियां
हमले के बाद मामला तब और वीभत्स हो गया जब संजय की बेटी नीशू आजाद ने अपने पिता पर हुए हमले के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाई। इसके बाद भारद्वाज और उसके समर्थकों द्वारा कथित तौर पर नीशू को निशाना बनाते हुए संगठित ऑनलाइन उत्पीड़न शुरू कर दिया गया।
14 वर्षीय नीशू को सोशल मीडिया पर दुष्कर्म की सीधी धमकियां दी जाने लगीं। उसकी तस्वीरों को मॉर्फ करके अश्लील रूप में प्रसारित किया गया। नीशू ने मीडिया को बताया, “मुझे घर से बाहर निकलने में भी डर और शर्म महसूस होने लगी थी। कई हफ्तों तक मैं स्कूल नहीं जा सकी। मुझे लगता था कि हर कोई मुझे ही गलत नजर से देख रहा है।” इस खुलासे के बाद बाल अधिकार कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया और पुलिस को पॉक्सो एक्ट के तहत दूसरी प्राथमिकी दर्ज करनी पड़ी।
बुलेट से भागा, हेलमेट से चेहरा छिपाया
जब सोशल मीडिया पर आक्रोश बढ़ा और संसद मार्ग थाने के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, तो भारद्वाज दिल्ली छोड़कर भाग निकला। पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे पकड़ने के लिए कई टीमें गठित कीं।
जांच में सामने आया कि भारद्वाज उत्तर प्रदेश के नैथला गांव से बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला था। अपनी पहचान छुपाने के लिए उसने लगातार हेलमेट पहन रखा था। वह खुर्जा की तरफ भागा और वहां एक स्थानीय कैब ड्राइवर के घर में शरण ली, जिससे उसकी पहले जान-पहचान थी। हालांकि, पुलिस की तकनीकी सर्विलांस टीम ने उसकी लोकेशन ट्रैक कर ली और शुक्रवार दोपहर उसे बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद भारद्वाज के तेवर पूरी तरह बदल गए। मीडिया के सामने उसने दावा किया कि उसने कोई जानबूझकर हमला नहीं किया था, बल्कि वह भीड़ के सामने “आत्मरक्षा” (सेल्फ डिफेंस) कर रहा था।
सियासी पारा चढ़ा: संसद मार्ग पर जोरदार प्रदर्शन
इस मामले में पुलिस की ढिलाई को लेकर विपक्ष और नागरिक संगठनों ने तीखे सवाल उठाए। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद तथा सांसद पप्पू यादव संसद मार्ग थाने पहुंचे।
वहां देर रात तक जोरदार धरना-प्रदर्शन चला। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, उस पर एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगाई जाएं और मामले में हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी जाए। पुलिस द्वारा कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद ही धरना समाप्त हुआ।
निष्कर्ष
स्वतंत्र भारद्वाज का मामला सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए चरमपंथी बयानों और हिंसा की शेखी बघारने वाले इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक कड़ा सबक है। कानूनी जानकारों का मानना है कि पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट जैसी गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज होने के कारण अब आरोपी को अदालत से आसानी से जमानत मिलना मुश्किल होगा।
