बिहार के लखीसराय में बड़ा हादसा: सावन की तीसरी सोमवारी पर अशोक धाम मंदिर में भगदड़, 7 महिलाओं की मौत, दर्जन भर घायल
लखीसराय, बिहार — सावन (श्रावण) महीने का पवित्र समय, जो शिव भक्तों के लिए असीम आस्था और उल्लास का प्रतीक होता है, सोमवार, 17 अगस्त 2026 को बिहार के लखीसराय में एक भीषण त्रासदी में बदल गया। जिले के प्रसिद्ध इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर, जिसे लोग प्यार और श्रद्धा से अशोक धाम मंदिर के नाम से जानते हैं, में जलाभिषेक के दौरान भारी भीड़ बेकाबू हो गई और भयानक भगदड़ मच गई। इस दिल दहला देने वाले हादसे में कम से कम 7 महिला श्रद्धालुओं की कुचलकर मौत हो गई है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
सावन की तीसरी सोमवारी होने के कारण मंदिर में सुबह से ही आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा था। करीब 50,000 श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए कतारों में लगे थे, तभी यह अप्रत्याशित और जानलेवा घटना घटित हो गई।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा: भगदड़ के मुख्य कारण
भारत में सावन के महीने में शिव मंदिरों में लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना एक सामान्य बात है। लेकिन लखीसराय के इस मंदिर में सोमवार की सुबह स्थिति प्रशासन के नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो गई। स्थानीय अधिकारियों और चश्मदीदों के अनुसार, सुबह 6:30 से 6:45 बजे के बीच मंदिर परिसर अपनी क्षमता से कहीं अधिक श्रद्धालुओं से भर चुका था। इसी दौरान एक के बाद एक कई घटनाएं हुईं जिन्होंने इस त्रासदी की नींव रखी:
- अचानक भीड़ का दबाव: स्थानीय अशोक धाम रेलवे स्टेशन पर एक ही समय में दो पैसेंजर ट्रेनें आकर रुकीं। इन ट्रेनों से अचानक हजारों की संख्या में श्रद्धालु एक साथ उतरे और मंदिर के मुख्य रास्ते की ओर बढ़ चले।
- बैरिकेडिंग का टूटना: भीड़ का दबाव इतना प्रचंड था कि महिलाओं की कतार को नियंत्रित करने के लिए लगाया गया लकड़ी और धातु का मुख्य बैरिकेड टूट गया।
- करंट फैलने की अफवाह: उसी समय, भीड़ के बीच अचानक यह अफवाह तेजी से फैल गई कि पास का एक बिजली का खंभा गिर गया है और नंगे तार से करंट फैल रहा है।
- जान बचाने की जद्दोजहद: करंट की झूठी खबर ने लोगों में दहशत फैला दी। खुद को बचाने के लिए लोग बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे। इसी अफरातफरी में कई महिलाएं फिसल कर गिर पड़ीं और पीछे से आ रही बेकाबू भीड़ उन्हें रौंदते हुए आगे निकल गई।
“हम गिर पड़े और ऊपर से लोग गुजरते गए” — चश्मदीदों का खौफनाक मंजर
हादसे में जीवित बची एक महिला ने मीडिया को उस भयानक पल की जानकारी देते हुए बताया, “हम शांति से महिलाओं की लाइन में लगे हुए थे। तभी अचानक पीछे से 10-12 महिलाओं ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। दबाव इतना ज्यादा था कि हम जमीन पर गिर पड़े। देखते ही देखते करीब 20-25 महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर गिरती चली गईं। नीचे दबी कई महिलाएं दम घुटने से बेहोश हो गईं।”
इस दौरान मौके पर मची चीख-पुकार और रुदन ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया। सबसे पहले स्थानीय लोग और अन्य श्रद्धालु ही देवदूत बनकर सामने आए और उन्होंने बेहोश पड़े लोगों को भीड़ के नीचे से बाहर निकाला।
प्रशासन का त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन और घायलों का इलाज
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन हरकत में आ गया। सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (एसडीपीओ) शिवम कुमार भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मंदिर परिसर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का मोर्चा संभाला। पुलिस ने तुरंत बैरिकेडिंग दुरुस्त कर भीड़ को रोका और घायलों को वहां से निकाला।
सभी घायलों को तुरंत लखीसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। दम घुटने (Asphyxiation) और कुचलने के कारण जिन मरीजों की हालत बेहद गंभीर थी, उन्हें बेहतर और जीवन रक्षक इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (PMCH) रेफर कर दिया गया है।
लखीसराय के जिलाधिकारी (डीएम) शैलेंद्र कुमार ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया, “सुबह करीब 6:30-6:45 बजे दो ट्रेनें एक साथ आईं, जिससे अप्रत्याशित रूप से भीड़ बढ़ गई। हमने भीड़ का अनुमान लगाकर व्यवस्था की थी, लेकिन एक तरफ की बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े।” बिजली गिरने की अफवाह पर एसडीपीओ शिवम कुमार ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है और सारे तथ्य जल्द ही सामने आएंगे।
मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुख, दिए जांच के आदेश
इस हृदयविदारक घटना पर बिहार सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा, “लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में हुए हादसे में महिला श्रद्धालुओं की मृत्यु की खबर अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें। प्रशासन को घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के लिए आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं।”
राज्य सरकार ने घटना के कारणों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी किसी भी प्रशासनिक चूक से बचा जा सके।
मंदिर प्रशासन और भीड़ प्रबंधन पर उठते गंभीर सवाल
अशोक धाम मंदिर में हुई यह भगदड़ भारत में धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) और उसके खराब बुनियादी ढांचे की कलई खोलती है। सावन की सोमवारी पर यहां लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद पहले से थी, फिर भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक और मजबूत स्टील बैरिकेडिंग की कमी साफ नजर आई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाने चाहिए। एंट्री और एग्जिट गेट को अलग-अलग करना, पब्लिक एड्रेस (PA) सिस्टम का प्रभावी उपयोग (ताकि अफवाहों को तुरंत रोका जा सके), और आपातकालीन मेडिकल कियोस्क की पर्याप्त व्यवस्था समय की मांग है।
अशोक धाम मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
लखीसराय स्थित इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर (अशोक धाम) पूर्वी भारत के प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है। इस मंदिर का इतिहास बेहद रोचक है। बताया जाता है कि 1977 में अशोक नाम के एक छोटे लड़के को जमीन के नीचे से यह विशाल शिवलिंग मिला था, जिसके बाद इस जगह का नाम उसी लड़के के नाम पर ‘अशोक धाम’ पड़ गया।
पिछले कुछ दशकों में एक छोटे से मंदिर से यह एक विशाल धार्मिक परिसर में बदल चुका है, जहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। हालांकि, श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट द्वारा मंदिर के सौन्दर्यीकरण पर तो खर्च किया गया है, लेकिन सोमवार की घटना यह साबित करती है कि लाखों की भीड़ को सुरक्षित संभालने का बुनियादी ढांचा अभी भी विकसित नहीं हो पाया है।
यह हादसा एक गंभीर चेतावनी है। जब तक देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन की आधुनिक तकनीक और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य नहीं किए जाते, तब तक आस्था के इन केंद्रों पर ऐसी त्रासदियों का खतरा मंडराता रहेगा।
