जम्मू-कश्मीर में सियासी भूचाल: क्या गिर जाएगी उमर अब्दुल्ला की सरकार? 25 बागी विधायकों का 14 दिन का अल्टीमेटम
जम्मू-कश्मीर में सियासी भूचाल: क्या गिर जाएगी उमर अब्दुल्ला की सरकार? 25 बागी विधायकों का 14 दिन का अल्टीमेटम
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के 25 विधायकों ने उमर अब्दुल्ला सरकार को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
- विधायकों ने कैबिनेट में फेरबदल और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग की है।
- श्रीनगर से सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी और लोकसभा से इस्तीफा देने का ऐलान कर बगावत को और तेज कर दिया है।
- जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में नेकां के पास 41 विधायक हैं; यदि 25 विधायक समर्थन वापस लेते हैं, तो सरकार गिर सकती है।
- संकट को टालने के लिए फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला आज बागी विधायकों से मुलाकात कर रहे हैं।
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन को अभी कुछ ही समय बीता है, लेकिन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार पर गहरे संकट के बादल मंडराने लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, नेशनल कॉन्फ्रेंस के लगभग 25 असंतुष्ट विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। इन विधायकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेंगे, जिससे यह नवगठित सरकार अल्पमत में आकर गिर सकती है।
इस गंभीर राजनीतिक संकट को टालने और डैमेज कंट्रोल के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मोर्चा संभाल लिया है और वे नाराज विधायकों के साथ बैठक कर रहे हैं।
विवाद की जड़: 27 अक्टूबर का कैबिनेट विस्तार
इस आंतरिक बगावत की मुख्य वजह 27 अक्टूबर 2026 को हुआ कैबिनेट विस्तार माना जा रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी कैबिनेट का विस्तार करते हुए चार नए मंत्रियों— अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी (अल्ताफ कालू) को शामिल किया था। इस दौरान निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
कैबिनेट में जगह न मिलने से कई वरिष्ठ विधायक नाराज हो गए। इनमें गुरेज के विधायक नजीर अहमद गुरेजी और ईदगाह के विधायक मुबराक गुल का नाम प्रमुख है। हालांकि, पार्टी ने मुबराक गुल को मनाते हुए उन्हें पार्टी का महासचिव नियुक्त कर दिया, लेकिन उनके समर्थकों ने पार्टी मुख्यालय पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
स्थिति तब और भावुक हो गई जब नेकां विधायक अब्दुल मजीद लरमी कैबिनेट में जगह न मिलने पर मीडिया के सामने रो पड़े। लरमी ने कहा, “मैं कैबिनेट में जगह पाने का हकदार था। मैं एक कानून का छात्र (लॉ ग्रेजुएट) हूं, जबकि जिसे चुना गया है वह मैट्रिक भी पास नहीं है। मुझे आखिरी समय तक मंत्री बनने की उम्मीद थी”।
25 बागी विधायकों की क्या हैं मुख्य मांगें?
विद्रोही विधायकों ने एक चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है, जिसने पार्टी नेतृत्व के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- वर्तमान मंत्रियों को हटाना: हालिया कैबिनेट विस्तार को रद्द किया जाए और वर्तमान मंत्रियों से उनके विभाग वापस लिए जाएं।
- पारदर्शी चयन: नए मंत्रिपरिषद का गठन योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर हो।
- सलाहकार की बर्खास्तगी: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। विधायकों का आरोप है कि वानी पार्टी के संगठनात्मक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप कर रहे हैं।
- विधायकों से परामर्श: भविष्य में किसी भी मंत्री की नियुक्ति से पहले सभी विधायकों से विचार-विमर्श किया जाए।
- अनुच्छेद 370 पर सख्त रुख: जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए सरकार और अधिक मजबूती से काम करे।
सांसद रुहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे ने बढ़ाई मुश्किलें
पार्टी के भीतर चल रहे इस घमासान को श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के बगावती सुरों ने और हवा दे दी है। मेहदी ने 3 नवंबर 2026 को नेशनल कॉन्फ्रेंस और अपनी लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।
पार्टी नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए मेहदी ने कहा, “क्राउन प्रिंस (उमर अब्दुल्ला की ओर इशारा) और उनकी मंडली जम्मू-कश्मीर को परिवार से मिली जागीर समझते हैं। वे सोचते हैं कि लोग सिर्फ वोट दें और अपनी औकात में रहें। वे हमें मूर्ख समझते हैं।”
मेहदी ने आगे कहा कि पार्टी ने सत्ता हासिल करने के लिए अनुच्छेद 370 की बहाली और कैदियों की रिहाई के वादे किए थे, लेकिन अब वे जनता को धोखा दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “मैं इस विश्वासघात का भागीदार बनने के बजाय अपनी सीट छोड़ना बेहतर समझूंगा। अंदर रहकर इस सड़ांध को ठीक नहीं किया जा सकता”।
पार्टी का बचाव और विधानसभा का गणित
बगावत की इन खबरों के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रवक्ता इफरा जान ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने 25 विधायकों की बगावत की खबरों को खारिज करते हुए सवाल किया, “यह 20-25 का आंकड़ा कहां से आ रहा है? क्या कोई तस्वीर या नामों की सूची है? कैबिनेट विस्तार के बाद एक या दो विधायकों का नाराज होना आम बात है, यह पूरे देश की हर राजनीतिक पार्टी में होता है”।
क्या कहती है विधानसभा की स्थिति?जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं, जिसका अर्थ है कि बहुमत के लिए 46 विधायकों की आवश्यकता है।
- नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के पास 41 विधायक हैं।
- सरकार को 6 कांग्रेस विधायकों का बाहर से समर्थन प्राप्त है, और 6 निर्दलीय विधायक भी सरकार के साथ हैं।
- जम्मू-कश्मीर के नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 9 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं, जिससे सबको संतुष्ट करना नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
यदि वाकई 25 विधायक अपने अल्टीमेटम पर कायम रहते हैं और समर्थन वापस ले लेते हैं, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास केवल 16 विधायक बचेंगे। कांग्रेस और निर्दलीयों के समर्थन के बावजूद यह आंकड़ा बहुमत से बहुत दूर रह जाएगा, जिससे उमर अब्दुल्ला सरकार का गिरना तय है।
आगे क्या? (Conclusion)
अगले 14 दिन जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं। फारूक अब्दुल्ला का राजनीतिक अनुभव और उमर अब्दुल्ला की सूझबूझ इस समय सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रही है। क्या वे असंतुष्ट विधायकों को मनाने में सफल होंगे, या जम्मू-कश्मीर एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और संभवतः नए चुनावों की ओर धकेल दिया जाएगा? यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि अब्दुल्ला परिवार बगावत करने वाले इन 25 विधायकों की महत्वाकांक्षाओं और मांगों को कैसे संतुलित करता है।
