वर्षा बंगले पर आधी रात को सीक्रेट मीटिंग: सीएम फडणवीस से मिले एनसीपी के दोनों गुटों के दिग्गज नेता, महाराष्ट्र में बड़ी राजनीतिक हलचल, विलय की चर्चाएं तेज
वर्षा बंगले पर आधी रात को सीक्रेट मीटिंग: सीएम फडणवीस से मिले एनसीपी के दोनों गुटों के दिग्गज नेता, महाराष्ट्र में बड़ी राजनीतिक हलचल, विलय की चर्चाएं तेज
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर आधी रात के एक गुप्त घटनाक्रम ने भूचाल ला दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक निवास ‘वर्षा’ पर मंगलवार की देर रात राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों धड़ों के वरिष्ठ नेताओं के बीच एक बेहद गोपनीय बैठक हुई। इस सीक्रेट मीटिंग की खबर जैसे ही सियासी गलियारों में आम हुई, वैसे ही राज्य में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर और एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय (Merger) की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में इस बात की भी जोरदार चर्चा है कि शरद पवार का गुट भी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बन सकता है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह हाई-प्रोफाइल बैठक लगभग डेढ़ घंटे तक चली। इस बैठक में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल के साथ-साथ उनके धुर विरोधी समझे जाने वाले एनसीपी (अजीत पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद थे। महायुति सरकार के मुखिया देवेंद्र फडणवीस के घर पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के एनसीपी नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन ‘महाविकास अघाड़ी’ (MVA) के भविष्य पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
राजनीतिक सफाई: सिर्फ 5 मिनट की मुलाकात या सोची-समझी रणनीति?
आधी रात को हुई इस बैठक की खबर मीडिया में फैलते ही जब राजनीतिक तूफान खड़ा हुआ, तो बैठक में शामिल नेताओं ने तुरंत इस पर डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) शुरू कर दिया। शरद पवार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक जयंत पाटिल ने इस मुलाकात के किसी भी राजनीतिक मायने होने से साफ तौर पर इनकार कर दिया। उन्होंने विलय की सभी खबरों को अफवाह बताते हुए कहा कि वह वहां केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र के एक प्रशासनिक मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने गए थे और उनका प्रफुल्ल पटेल या सुनील तटकरे से कोई लेना-देना नहीं था।
जयंत पाटिल ने मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “मैं प्रफुल्ल पटेल या सुनील तटकरे से बिल्कुल नहीं मिला। मैं रात करीब 10:30 बजे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने ‘वर्षा’ बंगले पर गया था। मेरा वहां जाने का एकमात्र कारण इस्लामपुर नगर पालिका के मेयर (अध्यक्ष) को अयोग्य ठहराए जाने का मुद्दा था। मुख्यमंत्री से संक्षिप्त चर्चा के बाद मैं महज पांच मिनट में वहां से निकल गया था। मुझे इस बात की जरा भी भनक नहीं थी कि वहां प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे।”
पाटिल के इस दौरे का बचाव करने के लिए महाविकास अघाड़ी के सहयोगी और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत भी तुरंत आगे आए। उन्होंने मीडिया में चल रही खबरों को पूरी तरह से गलत बताया। संजय राउत ने पाटिल के बयान का समर्थन करते हुए कहा, “आपकी जानकारी गलत है। जयंत पाटिल कल रात मुख्यमंत्री से मिले थे, लेकिन वह एक बिल्कुल अलग मामला है। वहां के स्थानीय कलेक्टर ने उनके निर्वाचन क्षेत्र के एक कानूनी रूप से चुने गए नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य घोषित कर दिया था, जो कि पूरी तरह से एक अवैध कार्रवाई थी। जयंत पाटिल इसी विशेष प्रशासनिक मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मुख्यमंत्री से मिलने गए थे।”
अंदरूनी हकीकत: विधायकों में असंतोष और फंड की किल्लत
भले ही विपक्ष के बड़े नेता इस मुलाकात को महज एक ‘इत्तेफाक’ या प्रशासनिक काम बताकर खारिज कर रहे हों, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे इतनी आसानी से नहीं देख रहे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति का इतिहास गवाह है कि यहाँ आधी रात को होने वाली बैठकों के पीछे हमेशा कोई न कोई बड़ी पटकथा लिखी जा रही होती है। सूत्रों का यह भी दावा है कि मुख्यमंत्री फडणवीस से मिलने से ठीक पहले इन तीनों एनसीपी नेताओं के बीच अलग से भी एक प्राथमिक स्तर की बातचीत हुई थी।
इस पूरी हलचल के पीछे की सबसे बड़ी वजह शरद पवार गुट के विधायकों के भीतर पनप रहा भारी असंतोष बताया जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के संकेत बताते हैं कि शरद पवार की पार्टी के कुल 10 विधायकों में से कम से कम 5 विधायक इस समय विपक्ष में रहने से बेहद परेशान हैं और वे भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन (महायुति) में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं।
इन विधायकों का तर्क है कि विपक्ष में बैठने के कारण उन्हें अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए सरकारी फंड (Constituency Funds) और प्रशासनिक मंजूरियां मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसी भी विधायक के लिए अपने क्षेत्र में दोबारा चुनकर आने के लिए विकास कार्य करना सबसे जरूरी होता है। सत्ता से बाहर होने के कारण उनके राजनीतिक अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने हाल ही में अपने विधायकों की इस गंभीर चिंता और भावनाओं से पार्टी सुप्रीमो शरद पवार को भी अवगत कराया था। उन्होंने पवार को स्पष्ट संकेत दिए थे कि पार्टी का एक बड़ा धड़ा अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भाजपा नीत गठबंधन के साथ जाने के पक्ष में है।
पवार की खामोशी और भविष्य के समीकरण
साल 2023 में एनसीपी में हुई बड़ी बगावत के बाद, जब अजीत पवार अपने साथ कई विधायकों को लेकर एनडीए सरकार में शामिल हो गए थे, तब से पार्टी दो फाड़ हो चुकी है। लेकिन हाल के दिनों में बदले राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच दोनों गुटों के फिर से एक होने की चर्चाएं समय-समय पर उठती रही हैं। अब इस गुप्त बैठक ने उन चर्चाओं को सबसे ज्यादा हवा दे दी है।
इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच सबसे रहस्यमयी बात एनसीपी के भीष्म पितामह शरद पवार की चुप्पी है। हमेशा अपनी अप्रत्याशित राजनीतिक चालों के लिए जाने जाने वाले शरद पवार ने अपने विधायकों की इस मांग और आधी रात की बैठक पर पूरी तरह से मौन धारण कर रखा है।
यदि यह विलय सच में धरातल पर उतरता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति का एक और सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट होगा। इससे न केवल महाविकास अघाड़ी गठबंधन को एक बड़ा झटका लगेगा, बल्कि आगामी चुनावों से पहले राज्य के सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल जाएंगे। अब देखना यह है कि ‘वर्षा’ बंगले की यह गुप्त मुलाकात महज एक प्रशासनिक इत्तेफाक थी या फिर महाराष्ट्र की सियासत में आने वाले किसी बड़े तूफान से पहले की शांति।
