पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा की Z+ सुरक्षा वापस ली, AAP में बढ़ते विवाद के बीच केंद्र ने दी नई सुरक्षा

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पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा की Z+ सुरक्षा वापस ली, AAP में बढ़ते विवाद के बीच केंद्र ने दी नई सुरक्षा

पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा की Z+ सुरक्षा वापस ली, AAP में बढ़ते विवाद के बीच केंद्र ने दी नई सुरक्षा

पंजाब की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की Z+ श्रेणी की सुरक्षा पंजाब सरकार ने वापस ले ली है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं और आंतरिक खींचतान तेज होती जा रही है। इस कदम ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि इसे AAP के अंदर चल रहे विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

अचानक सुरक्षा वापसी से बढ़े सवाल

सूत्रों के अनुसार, पंजाब सरकार द्वारा राघव चड्ढा को दी गई Z+ सुरक्षा अचानक वापस ले ली गई। उनके सुरक्षा में तैनात पंजाब पुलिस के जवानों को तुरंत मुख्यालय लौटने के निर्देश दिए गए।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया जब हाल ही में AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। इससे पहले तक वह पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते थे, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने उनके राजनीतिक कद पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

केंद्र सरकार ने संभाली जिम्मेदारी

पंजाब सरकार के इस फैसले के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए राघव चड्ढा को Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने यह फैसला खुफिया एजेंसियों की थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट के आधार पर लिया है।

नई व्यवस्था के तहत दिल्ली और पंजाब में उन्हें Z श्रेणी की सुरक्षा दी जाएगी, जबकि अन्य राज्यों में उन्हें Y श्रेणी की सुरक्षा मिल सकती है। इससे यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा एजेंसियां उनकी सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं।

AAP में बढ़ती दरार

यह पूरा घटनाक्रम AAP के अंदर बढ़ती दरार को उजागर करता है। राघव चड्ढा को 2 अप्रैल 2026 को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया गया था और उनकी जगह अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी गई थी।

पार्टी नेतृत्व की ओर से उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने संसद में केंद्र सरकार के खिलाफ पर्याप्त आक्रामक रुख नहीं अपनाया और पार्टी लाइन से हटकर काम किया। हालांकि, चड्ढा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें झूठा बताया।

सियासी बयानबाजी तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने AAP को आंतरिक रूप से कमजोर और अस्थिर पार्टी बताते हुए निशाना साधा है। वहीं AAP के अंदर भी नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के कुछ नेताओं ने चड्ढा पर गंभीर आरोप लगाए हैं और उन्हें पार्टी के खिलाफ काम करने वाला बताया है।

दूसरी ओर, अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में ED की कार्रवाई को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पंजाब चुनाव की तैयारी का हिस्सा है।

ED रेड और नेतृत्व बदलाव से जुड़ा मामला

राघव चड्ढा को हटाकर अशोक मित्तल को जिम्मेदारी देने के बाद ही ED ने मित्तल के ठिकानों पर छापेमारी की, जिससे पूरा मामला और ज्यादा उलझ गया।

इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि AAP के अंदर नेतृत्व को लेकर गंभीर मतभेद चल रहे हैं और पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन बदल रहा है।

राघव चड्ढा कौन हैं?

राघव चड्ढा भारतीय राजनीति के युवा और प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वह पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहने के बाद राज्यसभा सांसद बने।

AAP के शुरुआती दौर से ही वह अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाते रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाओं ने उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी को उजागर कर दिया है।

राजनीतिक असर और आगे की स्थिति

पंजाब में जहां AAP की सरकार है, वहां इस तरह के घटनाक्रम का सीधा असर शासन और राजनीतिक माहौल पर पड़ सकता है। एक तरफ पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने में जुट गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी के अंदर मतभेद इसी तरह सार्वजनिक होते रहे, तो इसका असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल, पंजाब सरकार ने सुरक्षा हटाने को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक कारण नहीं बताया है। वहीं केंद्र सरकार द्वारा नई सुरक्षा दिए जाने से यह मामला और अधिक राजनीतिक रंग ले चुका है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि AAP इस आंतरिक संकट को कैसे संभालती है और राघव चड्ढा की भूमिका आगे क्या रहती है।

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