डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका: अमेरिकी हाउस ने ईरान युद्ध रोकने के लिए ‘वॉर पॉवर्स रेजोल्यूशन’ सफलतापूर्वक पास किया

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डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका: अमेरिकी हाउस ने ईरान युद्ध रोकने के लिए 'वॉर पॉवर्स रेजोल्यूशन' सफलतापूर्वक पास किया

डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका: अमेरिकी हाउस ने ईरान युद्ध रोकने के लिए 'वॉर पॉवर्स रेजोल्यूशन' सफलतापूर्वक पास किया

वाशिंगटन डी.सी.: एक बेहद महत्वपूर्ण, राजनीतिक और ऐतिहासिक घटनाक्रम में, यूनाइटेड स्टेट्स हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (US House of Representatives) ने बुधवार को एक अहम ‘वॉर पॉवर्स रेजोल्यूशन’ (युद्ध शक्ति प्रस्ताव) को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ईरान के साथ पिछले तीन महीने से चल रहे भयानक और खर्चीले युद्ध को समाप्त करना है। यह कदम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के चलते, ना सिर्फ मध्य पूर्व (Middle East) बल्कि पूरी दुनिया में जो अस्थिरता और भारी आर्थिक संकट पैदा हुआ था, उसको देखते हुए अमेरिकी कांग्रेस का यह कदम काफी अहम और समय की मांग माना जा रहा है।

वोटिंग के आंकड़े और द्विदलीय समर्थन (Bipartisan Support) इस रेजोल्यूशन को 215-208 के करीबी अंतर (नैरो मार्जिन) से पास किया गया। हालांकि निचले सदन (Lower House) में डेमोक्रेट्स का बहुमत है, लेकिन इस बिल की सबसे दिलचस्प और खास बात यह रही कि चार मुख्य रिपब्लिकन नेताओं ने भी अपनी पार्टी लाइन और राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स का साथ दिया। थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक, टॉम बैरेट और वारेन डेविडसन – इन चार रिपब्लिकन सांसदों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में अपना वोट डालकर इस बात का साफ संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन की युद्ध और विदेश नीतियों को लेकर खुद उनकी पार्टी के अंदर भी बेचैनी और गहरा असंतोष बढ़ रहा है।

यह पहली बार है जब अमेरिकी हाउस ने इस तरह का प्रस्ताव सफलतापूर्वक पास किया है। इससे पहले भी इस युद्ध को रोकने के कई प्रयास किए गए थे, लेकिन वे बहुमत ना मिलने के कारण नाकाम रहे थे। जैसे-जैसे ईरान के साथ यह सैन्य संघर्ष लंबा खिंच रहा था, वैसे-वैसे राजनेताओं और आम जनता में इस युद्ध के आर्थिक और सामाजिक परिणामों को लेकर डर और बेचैनी बढ़ रही थी, जिसका सीधा असर इस वोटिंग के दौरान देखने को मिला।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और नेताओं के बयान हाउस डेमोक्रेटिक लीडर हकीम जेफरीज (न्यूयॉर्क) ने इस रेजोल्यूशन की वोटिंग से पहले और बाद में काफी आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने इस प्रस्ताव पर जोर देते हुए लगातार रिपब्लिकन साथियों से इसे समर्थन देने की अपील की थी। जेफरीज ने इस ईरान संघर्ष को एक “लापरवाह, बेहद खर्चीला और अनावश्यक युद्ध” करार दिया। उनके मुताबिक, पिछले तीन महीनों में इस युद्ध ने अमेरिकी करदाताओं (taxpayers) पर लगभग $100 बिलियन (सौ अरब डॉलर) से ज्यादा का आर्थिक बोझ डाल दिया है। इसके अलावा, उनका मानना है कि इस सैन्य कार्यवाही की वजह से वैश्विक मंच पर अमेरिका की स्थिति ईरान के मुकाबले मजबूत होने के बजाय और कमजोर हुई है।

वहीं, इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने वाले और इसे पेश करने वाले न्यूयॉर्क के डेमोक्रेट नेता ग्रेगरी मीक्स, जो हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के रैंकिंग सदस्य भी हैं, ने वोटिंग के बाद अपनी खुशी और राहत जाहिर की। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं बेहद खुश हूं कि हमें यह अवसर मिला कि कुछ रिपब्लिकन सदस्यों ने आगे आकर इस मुद्दे पर सही रुख अपनाया और सच्चाई का साथ दिया। मुझे अपने डेमोक्रेटिक साथियों पर भी बहुत गर्व है क्योंकि हर एक डेमोक्रेट ने—बिना किसी मतभेद के—इस प्रस्ताव के पक्ष में अपना वोट दिया।” उनका यह बयान दर्शाता है कि डेमोक्रेट्स इस मुद्दे पर पूरी तरह से एकजुट थे।

‘वॉर पॉवर्स रेजोल्यूशन 1973’ का कानूनी संदर्भ इस नए प्रस्ताव का कानूनी आधार ‘वॉर पॉवर्स रेजोल्यूशन 1973’ (जिसे वॉर पॉवर्स एक्ट भी कहा जाता है) है। 1973 का यह ऐतिहासिक कानून वियतनाम युद्ध के दौरान आई समस्याओं के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से बनाया गया था। इस कानून के तहत, अगर राष्ट्रपति किसी देश के खिलाफ सैन्य कार्यवाही या युद्ध शुरू करते हैं और उसे अमेरिकी कांग्रेस की औपचारिक (formal) मंजूरी नहीं मिलती है, तो उन्हें 60 दिन के अंदर अपनी सैन्य टुकड़ियों को युद्ध क्षेत्र से वापस बुलाना पड़ता है। हालांकि, अगर सांसद चाहें तो सैन्य आवश्यकता के आधार पर इस समय-सीमा को आगे बढ़ा सकते हैं। लेकिन इस रेजोल्यूशन के पास होने से यह संदेश स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस अब इस युद्ध को आगे बढ़ाने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है।

भू-राजनीतिक (Geopolitical) असर और वैश्विक आर्थिक संकट युद्ध के प्रभाव सिर्फ राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं होते हैं। इस ईरान-अमेरिका संघर्ष ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर एक संयुक्त हमला (joint attack) किया था, तभी से वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है। इस हमले के तुरंत जवाब में ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है।

  • सप्लाई चेन प्रभावित: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ऑयल चोकपॉइंट है, जहां से दुनियाभर का लगभग एक-तिहाई समुद्री कच्चा तेल (crude oil) का व्यापार होता है।
  • महंगाई में वृद्धि: इस अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग के बंद होने की वजह से वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में सप्लाई की भारी कमी हो गई है, जिससे तेल की कीमतों में अचानक बहुत बड़ा उछाल आया है।

इसका सबसे सीधा और नकारात्मक असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। अमेरिका में पेट्रोल पंपों पर गैस (पेट्रोल) की कीमतें आसमान छू रही हैं। उपभोक्ताओं पर महंगाई (inflation) का भारी दबाव बन गया है और उनका दैनिक बजट बिगड़ चुका है। अमेरिका के साथ-साथ यूरोप और एशिया के कई अन्य देशों में भी इस तेल संकट की वजह से महंगाई दर तेजी से बढ़ी है।

डोनाल्ड ट्रंप के लिए आगे की चुनौतियां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह पूरा घटनाक्रम काफी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ जहां उनकी अपनी ही पार्टी के नेता इस युद्ध के खिलाफ खड़े होकर उनकी नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता भी महंगाई और आर्थिक संकट की वजह से भारी नाराजगी जता रही है। घरेलू राजनीति और आने वाले चुनावों के मद्देनजर, यह प्रस्ताव ट्रंप के विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगाता है। आम अमेरिकी नागरिक अब $100 बिलियन जैसी भारी-भरकम रकम एक विदेशी युद्ध में लगाने के पक्ष में नहीं है। यह देखना अभी बाकी है कि व्हाइट हाउस कांग्रेस के इस कड़े कदम का किस तरह से कानूनी और राजनीतिक जवाब देता है।

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