सिक्किम टनल हादसा: भूस्खलन और जहरीली गैस रिसाव से मची तबाही, 8 मजदूरों की मौत और कई फंसे; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
सिक्किम टनल हादसा: भूस्खलन और जहरीली गैस रिसाव से मची तबाही, 8 मजदूरों की मौत और कई फंसे; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
सिक्किम के नामची (Namchi) जिले से एक बेहद दर्दनाक और भयानक हादसे की खबर सामने आई है। यहां एक निर्माणाधीन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंग (Tunnel) में अचानक हुए भारी भूस्खलन (Landslide) और उसके बाद जहरीली गैस के रिसाव ने भारी तबाही मचा दी है। इस हृदयविदारक घटना में अब तक 8 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य मजदूरों के अभी भी मलबे और गहरी सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है। घटना के बाद से ही युद्ध स्तर पर बचाव कार्य जारी है, लेकिन सुरंग के अंदर जमा मीथेन गैस (Methane Gas) और कम दृश्यता के कारण रेस्क्यू टीमों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
हादसे का मुख्य कारण: भूस्खलन और मीथेन गैस का विस्फोट
यह दर्दनाक हादसा दक्षिण सिक्किम के झोलुंगे (Jholungey) स्थित समरडुंग (Samardung) इलाके में सोमवार दोपहर करीब 3:00 से 3:40 बजे के बीच हुआ। यहां ‘तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट’ (Teesta Stage VI Hydroelectric Power Project) के लिए एक एडिक्ट सुरंग (ADIT tunnel) का निर्माण कार्य चल रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, पहाड़ी इलाके में हुए एक अचानक भूस्खलन ने सुरंग के मुख्य प्रवेश द्वार को पूरी तरह से मलबे से ढक दिया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूर वहीं फंस गए। स्थिति तब और भी ज्यादा भयावह हो गई, जब चट्टानों के खिसकने से अंडरग्राउंड रॉक फॉर्मेशन (Underground Rock Formation) में हलचल हुई और सुरंग के अंदर प्राकृतिक रूप से मौजूद मीथेन गैस का रिसाव शुरू हो गया।
कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि गैस के दबाव के कारण अंदर एक जोरदार धमाका हुआ, जिससे सुरंग का एक और हिस्सा ढह गया। इस जहरीली गैस ने सुरंग के संकरे रास्ते में ऑक्सीजन के स्तर को तेजी से कम कर दिया, जिससे अंदर फंसे लोगों का दम घुटने लगा।
मजदूरों की स्थिति और मृतकों का आंकड़ा
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (Prem Singh Tamang) ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस हादसे में 8 मजदूरों ने अपनी जान गंवा दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, जब भूस्खलन हुआ तब सुरंग के अंदर लगभग 27 मजदूर और इंजीनियर मौजूद थे।
इनमें से ज्यादातर कर्मचारी कॉन्ट्रैक्टर कंपनी ‘पटेल इंजीनियरिंग’ (Patel Engineering) और ‘नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन’ (NHPC) से जुड़े हुए थे। हादसे के तुरंत बाद कुछ मजदूर किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकलने में कामयाब रहे। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, लेकिन अभी भी 15 से अधिक मजदूरों के अंदर फंसे होने की आशंका है।
रेस्क्यू ऑपरेशन: गैस रिसाव बना सबसे बड़ी चुनौती
जैसे ही जिला प्रशासन को घटना की सूचना मिली, तुरंत कई एजेंसियों को बचाव कार्य में लगा दिया गया। इस समय राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सिक्किम पुलिस, और अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा (Fire and Emergency Services) की टीमें मोर्चे पर डटी हुई हैं।
हालांकि, यह रेस्क्यू ऑपरेशन अब तक के सबसे कठिन अभियानों में से एक साबित हो रहा है। सुरंग के अंदर मीथेन गैस के भारी रिसाव और शून्य दृश्यता (Zero Visibility) के कारण बचाव दल के सदस्यों को भी अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। सोमवार शाम को जब रेस्क्यू टीम ने पहली बार सुरंग में दाखिल होने की कोशिश की, तो ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस के कारण कई जवानों को चक्कर आने लगे और कुछ तो बेहोश तक हो गए। इसके बाद बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।
वर्तमान में बचाव कार्य के लिए पश्चिम बंगाल से एक विशेष टीम को भी एयरलिफ्ट करके बुलाया गया है। यह टीम अपने साथ गैस-सुरक्षा उपकरण, हेवी-ड्यूटी वेंटिलेशन पाइप और अत्याधुनिक ऑक्सीजन मास्क लेकर आई है। जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग (Anupa Tamling) खुद मौके पर मौजूद हैं और बचाव कार्यों की निगरानी कर रही हैं। घटनास्थल पर कई एंबुलेंस और मेडिकल टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि निकाले गए मजदूरों को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री तमांग का आश्वासन
इस बड़े हादसे की गूंज राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग को फोन कर हालात का जायजा लिया और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री तमांग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी देते हुए कहा:
“नामची जिले के समरडुंग में एनएचपीसी तीस्ता स्टेज VI जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुई दुखद घटना के बाद, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने मुझसे बात की। प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाओं और भारत सरकार की ओर से हर संभव सहायता के आश्वासन ने इस कठिन घड़ी में सिक्किम के लोगों को बहुत ताकत दी है।”
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया है कि फंसे हुए मजदूरों को निकालने के लिए किसी भी संसाधन की कमी नहीं होनी चाहिए।
हिमालयी क्षेत्र में निर्माण और पर्यावरण का जोखिम
यह हादसा एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों और उनके पर्यावरणीय जोखिमों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। तीस्ता नदी के बेसिन में चल रही यह जलविद्युत परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन सिक्किम का यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील (Fragile) है।
यहां बारिश और मानसून के मौसम में भूस्खलन एक आम बात है। जानकारों का मानना है कि सुरंग की खुदाई के दौरान अक्सर भूमिगत गैसों के पॉकेट्स से छेड़छाड़ हो जाती है। अगर सही वेंटिलेशन और सुरक्षा उपकरण (Gas Detectors) न हों, तो यह किसी भी समय बड़े हादसे का रूप ले सकता है। फिलहाल, प्रशासन की पहली प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को जीवित बाहर निकालना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद इस बात की गहन जांच की जाएगी कि क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) में कोई लापरवाही बरती गई थी।
पूरा सिक्किम और देश अब इसी प्रार्थना में जुटा है कि सुरंग के अंधेरे में फंसे बाकी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाए। हर बीतता मिनट उनके लिए जीवन और मृत्यु के बीच का संघर्ष बन गया है।
