दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की आयु में निधन: ‘गजनी’ और ‘लगान’ फेम एक्टर ब्लड कैंसर से हार गए जिंदगी की जंग
दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की आयु में निधन: 'गजनी' और 'लगान' फेम एक्टर ब्लड कैंसर से हार गए जिंदगी की जंग
भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाने वाले दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। प्रदीप रावत ने ‘गजनी’, ‘लगान’ और ‘सरफरोश’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी थी। मंगलवार की शाम को उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली, जिससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। सिनेमाई पर्दे पर हमेशा एक मजबूत और प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में नजर आने वाले प्रदीप रावत असल जिंदगी में पिछले कई सालों से एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन अंततः वह यह जंग हार गए। उनके निधन ने सिनेमा प्रेमियों को एक गहरे सदमे में डाल दिया है।
बीमारी और निधन का विस्तृत घटनाक्रम प्राप्त जानकारी और ‘द वीक’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदीप रावत पिछले पांच वर्षों से ब्लड कैंसर (रक्त कैंसर) जैसी जानलेवा बीमारी से बहादुरी से लड़ रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उनके मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने अभिनेता के निधन की पुष्टि करते हुए विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि मंगलवार की शाम लगभग 6:30 बजे प्रदीप रावत ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
प्रदीप रावत के स्वास्थ्य को लेकर जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक उन्होंने एक बार इस गंभीर बीमारी को मात दे दी थी और वह पूरी तरह से रिकवर हो चुके थे, लेकिन कुछ महीने पहले कैंसर फिर से वापस आ गया (कैंसर रिलैप्स)। इस बार बीमारी का हमला उनके शरीर पर ज्यादा भारी पड़ा। इसके बाद से उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। उन्हें बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए मुंबई के जाने-माने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में कई हफ्तों तक भर्ती रखा गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही थी। हालांकि, तमाम मेडिकल प्रयासों के बावजूद उनकी तबीयत में कोई सुधार न होने और हालत ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें भिवंडी के एक विशेष कैंसर अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंगलवार शाम को अचानक उनके शरीर में प्लेटलेट काउंट बहुत तेजी से गिर गया, जिसके परिणामस्वरूप उनका निधन हो गया।
शुरुआती संघर्ष और ‘महाभारत’ से मिली असीम ख्याति प्रदीप रावत का जन्म और उनका शुरुआती जीवन कला के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाता है। एक बाहरी व्यक्ति के रूप में इंडस्ट्री में कदम रखने वाले रावत ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 1985 में आई फिल्म ‘मेरी जंग’ से की थी। इस फिल्म में उनका रोल भले ही बहुत बड़ा न रहा हो, लेकिन उनके भीतर की अभिनय क्षमता और उनकी दमदार स्क्रीन प्रजेंस ने निर्देशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 1988 में आया, जब उन्हें बीआर चोपड़ा के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक टेलीविजन धारावाहिक ‘महाभारत’ में ‘अश्वत्थामा’ का किरदार निभाने का मौका मिला। ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा के रूप में उनके अभिनय को अपार सराहना मिली। उनका लंबा-चौड़ा कद, उनकी गहरी और भारी आवाज और उनके चेहरे के हाव-भाव इस पौराणिक किरदार के लिए बिल्कुल उपयुक्त साबित हुए। इस टीवी शो ने प्रदीप रावत को घर-घर में पहचान दिला दी और उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत में एक गंभीर और सशक्त अभिनेता के रूप में स्थापित कर दिया। आज भी जब महाभारत के अश्वत्थामा की बात होती है, तो दर्शकों के जेहन में सबसे पहला चेहरा प्रदीप रावत का ही आता है।
बॉलीवुड का सफर: ‘सरफरोश’ से लेकर ‘लगान’ तक टीवी की दुनिया में सफलता हासिल करने के बाद प्रदीप रावत ने बॉलीवुड फिल्मों की ओर अपना ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने सुपरस्टार आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘सरफरोश’ और ऑस्कर के लिए नामांकित फिल्म ‘लगान’ (2001) में बेहतरीन भूमिकाएं निभाईं। ‘लगान’ में उनका किरदार ‘देवा सिंह सोढ़ी’ आज भी सिनेप्रेमियों के जहन में ताजा है। देवा के रूप में उनका गुस्सा, उनकी देशभक्ति, एक पुरानी चोट का दर्द और क्रिकेट के मैदान पर अंग्रेजों के खिलाफ उनका प्रदर्शन दर्शकों के लिए यादगार बन गया।
‘लगान’ में उनके सह-कलाकार रहे अभिनेता यशपाल शर्मा ने प्रदीप रावत के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा, “प्रदीप रावत, हमारे गजनी, लगान के देवा, भगवान आपकी आत्मा को शांति दे (RIP)।” यशपाल शर्मा की यह पोस्ट उस सम्मान को दर्शाती है जो प्रदीप रावत के लिए उनके सह-कलाकारों के दिलों में था। इसके अलावा उन्होंने ‘द हीरो: लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई’ जैसी कई अन्य फिल्मों में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में खौफनाक खलनायक की छवि बॉलीवुड के साथ-साथ प्रदीप रावत ने दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में भी अपार सफलता प्राप्त की। अक्सर उत्तर भारतीय अभिनेताओं के लिए दक्षिण में सफल होना आसान नहीं होता, लेकिन प्रदीप रावत ने यह मिथक तोड़ दिया। उन्होंने अपना तेलुगु डेब्यू 2004 में एस.एस. राजामौली की सुपरहिट फिल्म ‘साइ’ (Sye) से किया था। लेकिन उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर जो ख्याति मिली, वह ए.आर. मुरुगादॉस द्वारा निर्देशित ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गजनी’ से मिली।
मूल रूप से तमिल में बनी ‘गजनी’ में उन्होंने मुख्य खलनायक का किरदार निभाया था, जो दर्शकों के बीच खौफ और रोमांच पैदा करने में सफल रहा। उनके इस किरदार की लोकप्रियता को देखते हुए जब 2008 में आमिर खान के साथ ‘गजनी’ का हिंदी रीमेक बनाया गया, तो उसमें भी मुख्य खलनायक के रूप में प्रदीप रावत को ही चुना गया। ‘गजनी’ में उनके द्वारा निभाए गए क्रूर और खूंखार विलेन के किरदार ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे खौफनाक खलनायकों की सूची में शीर्ष पर ला खड़ा किया। हिंदी रीमेक ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ के क्लब की शुरुआत की थी और सफलता के कई रिकॉर्ड तोड़े। इसके साथ ही प्रदीप रावत का नाम भी सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया।
इसके अलावा, प्रदीप रावत ने तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और तमिल सिनेमा में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कई उल्लेखनीय भूमिकाएं निभाईं। उनकी प्रमुख दक्षिण भारतीय फिल्मों में ‘स्टालिन’, ‘वीरम’, ‘1: नेनोक्काडाइन’ (1: Nenokkadine), ‘आयिरथिल इरुवर’ और ‘मार्केट राजा एमबीबीएस’ जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्होंने रजनीकांत से लेकर महेश बाबू और अजित कुमार जैसे दक्षिण भारत के लगभग सभी बड़े सुपरस्टार्स के साथ स्क्रीन साझा की।
विरासत और फिल्म जगत में शोक की लहर प्रदीप रावत का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी नहीं भरा जा सकेगा। वह उन चुनिंदा अभिनेताओं में से एक थे जिन्होंने भाषा, क्षेत्र और माध्यम (टीवी और सिनेमा) की सीमाओं को पार करते हुए पूरे भारत में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
उनके निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रशंसकों और फिल्म जगत की हस्तियों की ओर से श्रद्धांजलि का तांता लग गया है। आज प्रदीप रावत भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन ‘अश्वत्थामा’, ‘देवा सिंह सोढ़ी’ और ‘गजनी’ जैसे उनके द्वारा निभाए गए अमर किरदार हमेशा भारतीय सिनेमा की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे। इस दुख की घड़ी में पूरी फिल्म इंडस्ट्री और अनगिनत प्रशंसक उनके परिवार के साथ खड़े हैं।
