ईरान के शांति प्रस्ताव पर डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा प्रहार; युद्ध शक्तियों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में ही उठी विरोध की लहर
ईरान के शांति प्रस्ताव पर डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा प्रहार; युद्ध शक्तियों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में ही उठी विरोध की लहर
वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा दिए गए नवीनतम शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप के इस सख्त रुख ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि वॉशिंगटन के गलियारों में भी एक नया संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है। अपनी ही पार्टी के भीतर “वॉर पावर्स” (युद्ध शक्तियों) के इस्तेमाल को लेकर ट्रंप को दुर्लभ विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है, जो 2026 के राजनीतिक परिदृश्य को अस्थिर कर सकता है।
ईरान का प्रस्ताव और ट्रंप का ‘नो’
शनिवार को आई रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने यूरोपीय मध्यस्थों के माध्यम से एक “डी-एस्केलेशन” (तनाव कम करने) का प्रस्ताव भेजा था। इसमें परमाणु कार्यक्रम पर कुछ शर्तों के साथ बातचीत और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नई सीमाओं पर चर्चा की बात कही गई थी। हालांकि, व्हाइट हाउस ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसे “एक और धोखा” करार दिया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “ईरान केवल समय बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है। जब तक वे आतंकवाद का वित्तपोषण पूरी तरह बंद नहीं करते, किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा। हमारी ताकत ही हमारी शांति की गारंटी है।”
रिपब्लिकन पार्टी में दुर्लभ दरार
ट्रंप के इस फैसले का सबसे चौंकाने वाला पहलू घरेलू राजनीति से निकलकर आया है। आमतौर पर ट्रंप के पीछे चट्टान की तरह खड़े रहने वाले रिपब्लिकन सांसदों ने इस बार ‘वॉर पावर्स’ (युद्ध की घोषणा करने की संवैधानिक शक्ति) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अपनी ही सरकार को घेरा है।
सीनेट में कई वरिष्ठ रिपब्लिकन सदस्यों ने चिंता जताई है कि राष्ट्रपति कांग्रेस की अनुमति के बिना देश को एक पूर्ण युद्ध की ओर धकेल रहे हैं। यह असंतोष उस समय उभरा है जब ट्रंप प्रशासन ने फारस की खाड़ी में अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों की तैनाती के आदेश दिए हैं। विद्रोह का नेतृत्व कर रहे एक रिपब्लिकन सीनेटर ने कहा, “हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल करते नहीं देखना चाहते, लेकिन संविधान स्पष्ट है—युद्ध का फैसला राष्ट्रपति अकेले नहीं, बल्कि कांग्रेस को करना चाहिए।”
युद्ध शक्तियों (War Powers) का विवाद
विवाद की जड़ 1973 के ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ में है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति की बिना विधायी अनुमति के युद्ध लड़ने की शक्ति को सीमित करता है। ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि ईरान के खिलाफ हालिया कार्रवाई “आत्मरक्षा” के दायरे में आती है, जबकि विरोधियों का कहना है कि यह आक्रामक युद्ध की तैयारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर यह दरार बढ़ती है, तो डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर वे ट्रंप की सैन्य शक्तियों को सीमित करने के लिए एक द्विदलीय (bipartisan) प्रस्ताव ला सकते हैं। यह ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के लिए एक बड़ी राजनीतिक हार साबित हो सकती है।
मध्य पूर्व में तनाव का चरम
मैदान पर स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। ट्रंप द्वारा प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि उनके आर्थिक हितों पर चोट पहुंचाई गई, तो वे ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद कर सकते हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने पुष्टि की है कि क्षेत्र में ‘स्ट्राइक ग्रुप’ तैनात कर दिए गए हैं। इजरायल और सऊदी अरब ने ट्रंप के इस कड़े रुख का समर्थन किया है, लेकिन यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने बार-बार संयम बरतने की अपील की है।
क्या यह 2026 के चुनाव का एजेंडा है?
राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग यह भी मानता है कि ट्रंप का यह आक्रामक रुख 2026 के मध्यावधि चुनावों और आगामी राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया गया है। वे खुद को एक “मजबूत नेता” के रूप में पेश करना चाहते हैं जो दबाव में नहीं झुकता। लेकिन अपनी ही पार्टी में “वॉर पावर्स” पर घेरे जाने से उनकी यह रणनीति उलटी पड़ती दिख रही है।
रिपब्लिकन पार्टी के भीतर यह विद्रोह दर्शाता है कि अब अमेरिकी राजनेता एक और लंबे और खर्चीले मध्य पूर्व युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। वे चाहते हैं कि देश की ऊर्जा विदेशी संघर्षों के बजाय घरेलू विकास पर केंद्रित हो।
