ब्रिटेन में गौतम अडानी का बड़ा दांव: जानिए क्यों ब्रिटेन की सबसे बड़ी पोर्ट कंपनी पर है अडानी की नजर

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ब्रिटेन में गौतम अडानी का बड़ा दांव: जानिए क्यों ब्रिटेन की सबसे बड़ी पोर्ट कंपनी पर है अडानी की नजर

ब्रिटेन में गौतम अडानी का बड़ा दांव: जानिए क्यों ब्रिटेन की सबसे बड़ी पोर्ट कंपनी पर है अडानी की नजर

ब्रिटेन में गौतम अडानी का बड़ा दांव: जानिए क्यों ब्रिटेन की सबसे बड़ी पोर्ट कंपनी पर है अडानी की नजर

लंदन/अहमदाबाद — वैश्विक समुद्री व्यापार की दुनिया में इन दिनों एक बड़ी खबर सुर्खियों में है। चर्चा है कि भारत की सबसे बड़ी निजी बंदरगाह ऑपरेटर कंपनी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ), यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के सबसे महत्वपूर्ण पोर्ट ऑपरेटर, ‘एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स’ (ABP) को खरीदने की तैयारी कर रही है। अगर यह सौदा तय हो जाता है, तो यह गौतम अडानी के नेतृत्व वाले समूह का अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बुनियादी ढांचा अधिग्रहण होगा और ब्रिटेन में उनका पहला बड़ा निवेश होगा। अनुमान है कि यह सौदा 10 अरब पाउंड (लगभग ₹1.07 लाख करोड़) से अधिक का हो सकता है।

यह अटकलें तब तेज हो गईं जब ऐसी खबरें आईं कि कैनेडियन पेंशन फंड – ‘सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स’ (CPPIB) और ‘ओंटारियो म्युनिसिपल एम्प्लॉइज रिटायरमेंट सिस्टम’ (OMERS), जिनकी एबीपी (ABP) में सामूहिक रूप से 63.9% की बड़ी हिस्सेदारी है, वे इसे बेचने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं और इसके लिए उन्होंने बैंकर्स को काम पर रख लिया है।

जब अडानी पोर्ट्स से इस संभावित अधिग्रहण के बारे में सवाल किया गया, तो कंपनी ने ना तो इसकी पुष्टि की और ना ही अफवाहों को पूरी तरह से खारिज किया। शेयर बाजार को दी गई एक फाइलिंग में, APSEZ के प्रवक्ता ने कहा, “कंपनी लगातार उन अवसरों का मूल्यांकन करती है जो हमारी दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप हों और सभी हितधारकों के लिए स्थायी मूल्य पैदा करें।” कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि नीति के तहत वह “बाजार की अटकलों या अफवाहों” पर टिप्पणी नहीं करती है।

एबीपी (ABP) क्यों है इतनी खास?

एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स (ABP) कोई साधारण कंपनी नहीं है; यह यूनाइटेड किंगडम के समुद्री व्यापार और ऊर्जा बुनियादी ढांचे की रीढ़ है।

इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में फैले 21 व्यस्त बंदरगाहों का स्वामित्व और संचालन एबीपी के पास है। यह कंपनी ब्रिटेन के कुल समुद्री व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा संभालती है। इसकी सबसे बड़ी संपत्तियों में साउथैम्प्टन बंदरगाह (Port of Southampton) शामिल है, जो ब्रिटेन का सबसे बड़ा निर्यात केंद्र है और सालाना लगभग 40 अरब पाउंड का माल संभालता है। इसके अलावा, इम्मिंगहैम बंदरगाह (Port of Immingham) भी इसके अधीन है, जो माल की मात्रा (टन भार) के हिसाब से ब्रिटेन का सबसे बड़ा बंदरगाह है।

पारंपरिक कार्गो के अलावा, एबीपी ब्रिटेन के हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) ट्रांजिशन से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह ब्रिटेन के 50% से अधिक अपतटीय पवन क्षेत्र (offshore wind sector) के लिए संचालन और रखरखाव (O&M) का काम करता है। अडानी पोर्ट्स जैसी कंपनी, जो अपतटीय समुद्री सेवाओं में अपनी उपस्थिति का विस्तार करना चाहती है, के लिए यह एक बेहद रणनीतिक और आकर्षक सौदा हो सकता है।

वित्तीय रूप से भी एबीपी एक मजबूत कंपनी है। इसकी आय का एक बड़ा हिस्सा ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक अनुबंधों (long-term contracts) से आता है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव की परवाह किए बिना आय की गारंटी देता है।

अडानी पोर्ट्स के लिए यह सौदा क्यों अहम है?

APSEZ के लिए, एबीपी में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करना इसकी आक्रामक वैश्विक विस्तार रणनीति के बिल्कुल अनुरूप है। अडानी पोर्ट्स पहले से ही भारत में एक दिग्गज कंपनी है, जो 15 बंदरगाहों का प्रबंधन करती है। इन बंदरगाहों की कुल क्षमता लगभग 653 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) है। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने रिकॉर्ड 500.8 MTPA कार्गो संभाला था।

हालांकि, कंपनी का विजन भारत के तटों से कहीं आगे तक फैला है। APSEZ का लक्ष्य 2030 तक सालाना एक अरब टन कार्गो संभालना है और 2031 तक खुद को दुनिया की सबसे बड़ी परिवहन उपयोगिता (transport utility) के रूप में स्थापित करना है। कंपनी पहले ही वैश्विक स्तर पर अपने झंडे गाड़ चुकी है, जिसमें इज़राइल के हाइफा पोर्ट (Haifa Port), तंजानिया के डार एस सलाम (Dar es Salaam), श्रीलंका के कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल और ऑस्ट्रेलिया के नॉर्थ क्वींसलैंड एक्सपोर्ट टर्मिनल में इसकी हिस्सेदारी है।

एबीपी का अधिग्रहण करने से अडानी पोर्ट्स रातों-रात एक उभरते वैश्विक खिलाड़ी से यूरोपीय समुद्री लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की एक प्रमुख ताकत बन जाएगी।

कड़ी टक्कर की उम्मीद

हालांकि अडानी पोर्ट्स इस सौदे के लिए एक मजबूत दावेदार है, लेकिन एबीपी पर नजर रखने वाली यह अकेली दिग्गज कंपनी नहीं है। इतनी महत्वपूर्ण संपत्ति की बिक्री ने स्वाभाविक रूप से कई वैश्विक दिग्गजों का ध्यान खींचा है। उद्योग की रिपोर्टों के अनुसार, दुबई की डीपी वर्ल्ड (DP World), निजी इक्विटी फर्म केकेआर (KKR), ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (GIP), और कनाडा की ब्रुकफील्ड (Brookfield) जैसी कंपनियां भी इस बोली प्रक्रिया में शामिल हो सकती हैं।

यह स्थिति हाल के ब्रिटिश इतिहास में सबसे बहुप्रतीक्षित बुनियादी ढांचा बिक्री का मंच तैयार कर रही है। इस सौदे का परिणाम न केवल अडानी पोर्ट्स की वैश्विक दिशा तय करेगा, बल्कि ब्रिटेन के व्यापार, ऊर्जा परिवर्तन और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा नीति पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा। जैसे-जैसे बोली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, पूरी समुद्री दुनिया की नजर इस बात पर होगी कि क्या गौतम अडानी अपनी महत्वाकांक्षाओं का जहाज ब्रिटिश जलक्षेत्र में उतार पाएंगे या नहीं।

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