मोदी 3.0 की वर्षगांठ: कांग्रेस का केंद्र पर बड़ा हमला, 75 पन्नों के ‘प्रॉमिस वर्सेज रियलिटी’ दस्तावेज़ से खोली सरकार के दावों की पोल
मोदी 3.0 की वर्षगांठ: कांग्रेस का केंद्र पर बड़ा हमला, 75 पन्नों के 'प्रॉमिस वर्सेज रियलिटी' दस्तावेज़ से खोली सरकार के दावों की पोल
केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार, यानी ‘मोदी 3.0’ ने अपने तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही केंद्र की सत्ता पर काबिज हुए भारतीय जनता पार्टी को पूरे 12 साल हो चुके हैं। इस महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर अब तक का सबसे तीखा और सुनियोजित राजनीतिक हमला बोला है। मंगलवार, 9 जून 2026 को कांग्रेस पार्टी ने ‘प्रॉमिस वर्सेज रियलिटी’ (वादे बनाम हकीकत) नाम से एक विस्तृत दस्तावेज़ जारी किया। इस दस्तावेज़ के माध्यम से कांग्रेस ने मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल का कच्चा चिट्ठा देश के सामने रखने का दावा किया है। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले एक दशक से अधिक का समय केवल बड़ी-बड़ी घोषणाओं, खोखले दावों, भव्य आयोजनों और मीडिया की सुर्खियों तक सीमित रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में आम जनता के जीवन में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं आया है।
75 पन्नों का ‘प्रॉमिस वर्सेज रियलिटी’ दस्तावेज़
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के रिसर्च विभाग द्वारा तैयार किए गए इस 75 पन्नों के दस्तावेज़ को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव गौड़ा और अमिताभ दुबे ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जारी किया। इस दस्तावेज़ को मुख्य रूप से सरकार के ‘प्रचार’ (Propaganda) के जवाब में कांग्रेस का ‘हिसाब’ (Accountability) करार दिया गया है।
इस व्यापक रिपोर्ट में मोदी सरकार की नीतियों की 15 अलग-अलग मोर्चों पर गहन समीक्षा की गई है। इनमें मुख्य रूप से देश की अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, विदेश नीति, ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन, कृषि क्षेत्र का संकट, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की दुर्दशा, बुनियादी ढांचे का विकास, शहरी विकास, सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं, नागरिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक कल्याण, सुशासन और कानून व्यवस्था शामिल हैं। कांग्रेस का स्पष्ट तर्क है कि सरकार द्वारा पेश किए जा रहे सुनहरे आंकड़ों और आम आदमी की रसोई, रोजगार और बैंक खाते की वास्तविक स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है।
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर ‘प्रचार बनाम हिसाब’
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राजीव गौड़ा ने कहा कि सरकार लगातार यह प्रचारित कर रही है कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। लेकिन कांग्रेस ने इसके विपरीत जमीनी हकीकत पेश की है। कांग्रेस के दस्तावेज़ में दावा किया गया है कि रुपये की लगातार कमजोरी और गिरती क्रय शक्ति के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था का वास्तविक आकार आम आदमी के लिए सिकुड़ रहा है। पार्टी ने कहा कि आर्थिक नीतियां केवल चंद पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं, जबकि देश का एमएसएमई (MSME) सेक्टर जो सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करता है, वह नोटबंदी, गलत तरीके से लागू किए गए जीएसटी और अब वैश्विक आर्थिक झटकों के कारण वेंटिलेटर पर है।
उज्ज्वला योजना पर मल्लिकार्जुन खरगे का सीधा प्रहार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस अवसर पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) में सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या में की गई कटौती को लेकर मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर खरगे ने लिखा, “मोदी सरकार के 12 सालों में गरीबी घटाने के अभियान की असलियत यह है कि पहले गरीब से मनरेगा के तहत काम का अधिकार छीना गया, और अब उसके मुंह से रोटी का निवाला भी छीना जा रहा है।”
खरगे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया था कि उज्ज्वला योजना के तहत महिलाओं को लकड़ी के चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिलेगी और हर लाभार्थी को साल में 12 सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर देने का वादा किया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि पिछले साल इन सिलेंडरों की संख्या 12 से घटाकर 9 कर दी गई। और अब, 2026 में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर महज 4 कर दी गई है। खरगे ने तंज कसते हुए कहा, “संक्षेप में कहें तो वादा 12 का था, लेकिन नीयत केवल 4 देने की है।”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि रसोई गैस की कीमतों में लगातार हो रही बेतहाशा वृद्धि के कारण आज देश के लगभग 5.56 करोड़ लाभार्थी सिलेंडर दोबारा भरवाने (Refill) में पूरी तरह असमर्थ हैं। खरगे ने कहा, “महंगे सिलेंडर छोड़ने को मजबूर हमारी माताएं और बहनें वापस पारंपरिक चूल्हे की ओर लौटने को विवश हैं, जबकि सत्ता के नशे में चूर मोदी सरकार उनकी दुर्दशा पर केवल घड़ियाली आंसू बहा रही है।”
लोकतंत्र के क्षरण और मतदाता सूची से छेड़छाड़ का आरोप
इस 75 पन्नों के ‘प्रॉमिस वर्सेज रियलिटी’ दस्तावेज़ में केवल आर्थिक नीतियों को ही नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर हो रहे प्रहार को भी प्रमुखता से उठाया गया है। राजीव गौड़ा ने सरकार के ‘लोकतंत्र को मजबूत करने’ के वादे की धज्जियां उड़ाते हुए एक बेहद गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश भर में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए लगभग 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से रहस्यमय तरीके से गायब या डिलीट कर दिए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है और राजनीतिक असहमति की आवाज़ को कुचलने के लिए सरकारी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग अब एक सामान्य बात हो गई है।
मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की बदहाली
कांग्रेस ने अपने दस्तावेज़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की बदहाली का भी जिक्र किया। कांग्रेस का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में भयंकर बेरोजगारी के बावजूद मनरेगा के बजट में कटौती की गई है, जिससे गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों के पास आजीविका का कोई ठोस साधन नहीं बचा है। मनरेगा के तहत काम मांगने वालों को समय पर काम नहीं मिल रहा है और जिन्हें काम मिल रहा है, उनका भुगतान महीनों तक अटका रहता है। यह सीधा तौर पर सरकार की ‘गरीबी उन्मूलन’ की बयानबाजी को खोखला साबित करता है।
सरकार का बचाव और वैश्विक परिस्थितियों का हवाला
कांग्रेस के इन तीखे हमलों के बीच सरकार और सत्ताधारी दल ने भी अपना जोरदार बचाव किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी सूत्रों की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वैश्विक स्तर पर छाई आर्थिक अस्थिरता और पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे भयंकर युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके बावजूद, भारत सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश के नागरिकों को रसोई गैस और अन्य जरूरी चीजें दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले सबसे कम कीमत पर मिलें।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर को सप्लाई करने की वास्तविक लागत 1,600 रुपये से अधिक हो गई है। लेकिन सरकार इस भारी सब्सिडी का बोझ खुद उठा रही है ताकि आम जनता पर इसका सीधा असर न पड़े। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस केवल भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है। भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.7 प्रतिशत के पार पहुंच गई है और विपरीत वैश्विक झटकों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था की नींव बेहद मजबूत है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, मोदी 3.0 की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर कांग्रेस का यह ‘प्रॉमिस वर्सेज रियलिटी’ दस्तावेज़ देश की राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दे रहा है। एक तरफ जहां सरकार अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाते हुए भारत को विश्व पटल पर एक अजेय आर्थिक महाशक्ति के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष ने महंगाई, ग्रामीण बेरोजगारी, सिलेंडर सब्सिडी में भारी कटौती और लोकतांत्रिक अधिकारों के कथित हनन जैसे जमीनी मुद्दों को उठाकर सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। आने वाले समय में यह ‘प्रचार बनाम हिसाब’ की तीखी राजनीतिक लड़ाई आम जनता के बीच और भी गहराने की संभावना है।
