जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में भड़की हिंसा: दिल्ली पुलिस ने शुरू की साजिश की जांच, 250 से अधिक वीडियो खंगाल रही पुलिस
जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में भड़की हिंसा: दिल्ली पुलिस ने शुरू की साजिश की जांच, 250 से अधिक वीडियो खंगाल रही पुलिस
नई दिल्ली 21 जुलाई 2026
राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर भारी हिंसा, पथराव और अफरा-तफरी का गवाह बना है। सोमवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब प्रदर्शनकारियों ने उग्र रूप धारण कर लिया। शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ यह धरना-प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। इस गंभीर घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है और इसे एक सुनियोजित साजिश के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
मुख्य बिंदु (Highlights):
- जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान उग्र भीड़ ने की तोड़फोड़ और पत्थरबाजी।
- संसद मार्ग और कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में 5 अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज।
- उपद्रवियों की पहचान के लिए 250 से अधिक सीसीटीवी, ड्रोन और मोबाइल वीडियो की हो रही है पड़ताल।
- हिंसा में 118 पुलिसकर्मी और लगभग 60 प्रदर्शनकारी घायल।
- व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से भीड़ जुटाने की साजिश की हो रही है जांच।
हिंसा का घटनाक्रम और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
सोमवार को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थक अपनी मांगों को लेकर एकत्रित हुए थे। पुलिस के अनुसार, शुरुआत में प्रदर्शन सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही घंटों में भीड़ उग्र हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया।
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। उपद्रवियों ने सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया और पुलिस के वाहनों में भी तोड़फोड़ की। इस हिंसक झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में अब तक पांच प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या आगे और भी बढ़ सकती है क्योंकि मामले की परतें लगातार खुल रही हैं।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामले दर्ज
इस मामले में पुलिस ने नई लागू की गई ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। एफआईआर में दंगा भड़काने, हिंसा करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और पुलिस के उपकरण (जैसे दंगा-रोधी जैकेट और हेलमेट) छीनने के आरोप शामिल हैं। यह दर्शाता है कि पुलिस इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच और 250+ वीडियो का विश्लेषण
आधुनिक पुलिसिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली पुलिस उपद्रवियों की पहचान सुनिश्चित करने में जुट गई है। जांचकर्ता 250 से अधिक वीडियो फुटेज का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं। इन फुटेज में शामिल हैं:
- प्रदर्शन स्थल के आसपास लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग।
- भीड़ पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किए गए ड्रोन कैमरों के दृश्य।
- पुलिसकर्मियों द्वारा पहने गए बॉडी-वॉर्म कैमरों (Body-worn cameras) की फुटेज।
- आम लोगों और मीडिया कर्मियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए मोबाइल वीडियो।
चेहरा पहचान तकनीक (Facial Recognition Technology) और अन्य डिजिटल टूल्स की मदद से उन लोगों को चिन्हित किया जा रहा है जिन्होंने सबसे पहले बैरिकेड्स तोड़े या सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंके।
क्या यह एक सुनियोजित साजिश थी?
पुलिस इस पूरे घटनाक्रम में ‘साजिश के एंगल’ (Conspiracy Angle) की भी गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि यह हिंसा अचानक नहीं भड़की, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
इस बात की जांच की जा रही है कि क्या उपद्रवियों का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। इसके साथ ही, पुलिस की साइबर सेल डिजिटल कम्यूनिकेशन पैटर्न खंगाल रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जुटाने और फिर हिंसा भड़काने के लिए व्हाट्सएप (WhatsApp) या टेलीग्राम (Telegram) जैसे मैसेजिंग ऐप्स पर खास ग्रुप्स बनाए गए थे। यदि यह साबित होता है कि हिंसा पूर्वनियोजित थी, तो इसके आयोजकों और भड़काने वालों पर रासुका (NSA) या अन्य कड़े कानून भी लगाए जा सकते हैं।
घायलों का आंकड़ा: सुरक्षाबलों को भारी नुकसान
इस हिंसक घटना का सबसे दुखद पहलू इसमें घायल हुए लोगों की संख्या है। पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उपद्रवियों के हमले में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। कई पुलिसकर्मियों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गहरी चोटें आई हैं। दूसरी ओर, पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और मची भगदड़ में लगभग 60 प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की सूचना है। सभी घायलों को नई दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान
दिल्ली पुलिस ने सोमवार देर शाम एक आधिकारिक बयान जारी कर पूरी घटना की निंदा की। पुलिस प्रवक्ता ने कहा:
“आज नई दिल्ली इलाके में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बेहद अनियंत्रित, आक्रामक और हिंसक व्यवहार का प्रदर्शन किया। पुलिस द्वारा बार-बार दी गई चेतावनियों और कानूनी निर्देशों के बावजूद, उन्होंने वहां से हटने से इनकार कर दिया और जानबूझकर इलाके में लागू निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) का उल्लंघन किया।”
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना लोकतंत्र में सबका अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने या सुरक्षाबलों पर हमला करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
आगे की राह और प्रशासन की चुनौती
जंतर-मंतर लंबे समय से भारत में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों का एक प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन ऐसी घटनाएं इस स्थल की सुरक्षा और भविष्य में होने वाले प्रदर्शनों की अनुमति पर सवालिया निशान लगाती हैं। फिलहाल दिल्ली पुलिस का पूरा ध्यान वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की धरपकड़ करने पर है। आने वाले कुछ दिनों में इस मामले में कई गिरफ्तारियां होने की संभावना है। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उनके पास इस हिंसा से जुड़ा कोई वीडियो या जानकारी है, तो वे उसे जांच एजेंसियों के साथ साझा करें।
