खौफनाक रात: भिवंडी में जर्जर इमारत गिरने से 8 लोगों की मौत, मलबे में कई और जिंदगियां दबीं
खौफनाक रात: भिवंडी में जर्जर इमारत गिरने से 8 लोगों की मौत, मलबे में कई और जिंदगियां दबीं
भिवंडी, महाराष्ट्र — भिवंडी का बालाजी नगर इलाका गुरुवार की रात हमेशा की तरह शांत था। लेकिन रात के करीब 11:30 बजे इस खामोशी को चीरती हुई एक ऐसी खौफनाक आवाज आई जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। यह आवाज कंक्रीट और लोहे के गिरने की थी। चार मंजिला ‘कोहिनूर बिल्डिंग’ (Kohinoor Building) का ‘बी विंग’ (B Wing) भरभरा कर गिर गया था, और अपने साथ कई परिवारों को मलबे के एक पहाड़ के नीचे जिंदा दफन कर गया।
शुक्रवार, 31 जुलाई, 2026 की सुबह तक इस तबाही का खौफनाक मंजर पूरी तरह साफ हो गया था। मुंबई और इसके आसपास के इलाकों में मंडरा रहे मानसूनी बादलों के बीच, बचाव दल समय के खिलाफ एक हताश लड़ाई लड़ रहे हैं। सुबह 10:45 बजे तक मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 8 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अधिकारियों को आशंका है कि 4 से 5 लोग अभी भी भारी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।
कोहिनूर बिल्डिंग का ढहना कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और इंसानी मजबूरी का एक जीता जागता सुबूत है। भिवंडी-निजामपुर नगर निगम (Bhiwandi-Nizampur Municipal Corporation) ने पहले ही इस इमारत को ‘खतरनाक’ (C-1 कैटेगरी) घोषित कर दिया था। इसका मतलब था कि इस इमारत को तुरंत खाली करके तोड़ा जाना चाहिए था। लेकिन विडंबना देखिए कि जब यह इमारत गिरी, तब इस जर्जर ढांचे को बचाने के लिए वहां मरम्मत का काम चल रहा था।
इस इमारत में कुल 48 कमरे थे, जो चार मंजिलों में बंटे हुए थे और वहां कई परिवार घनी आबादी के बीच रह रहे थे। गुरुवार की रात इमारत गिरने से पहले ही कुछ डरावने संकेत मिलने शुरू हो गए थे।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार रात 8:00 बजे से 9:00 बजे के बीच इमारत की दीवारों और फर्श से तेज ‘चटकने की आवाजें’ (cracking sounds) आने लगीं। खतरे को भांपते हुए स्थानीय लोग और पड़ोसी मदद के लिए दौड़े और उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए कई घबराए हुए परिवारों को रात के अंधेरे में सड़क पर सुरक्षित निकाल लिया।
लेकिन बदकिस्मती से, सभी को नहीं बचाया जा सका। जब कई लोग केवल अपने पहने हुए कपड़ों में बाहर भाग रहे थे, तब कुछ लोग अपना सामान समेटने के लिए या सीढ़ियों से नीचे उतरने की कोशिश में अंदर ही रह गए। और तभी ‘बी विंग’ एक जोरदार धमाके के साथ जमींदोज हो गया, और वो लोग भारी मलबे के नीचे दब गए।
हादसे में बचे लोगों की आपबीती रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जो लोग पहली मंजिल से कूदकर या किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे, उनके चेहरे पर मौत को इतने करीब से देखने की दहशत साफ नजर आ रही है। स्थानीय लोगों की सूझबूझ और फुर्ती ने कई जिंदगियां बचाईं, जो तुरंत सीढ़ियां लेकर दौड़े और घायल व घबराए हुए लोगों को मलबे से बाहर निकाला। हादसे के तुरंत बाद बचाए गए एक घायल बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
लेकिन उन परिवारों का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, जो अभी भी मलबे के ढेर के पास खड़े होकर अपनों के जिंदा बाहर आने का चमत्कार होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
हादसे के तुरंत बाद एक बहुत बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF), ठाणे डिजास्टर रिस्पांस फोर्स, फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस की टीमें पूरी रात मलबे में जिंदगियां तलाशती रहीं और यह काम शुक्रवार सुबह भी जारी है।
निवासी उप जिलाधिकारी (Resident Deputy Collector) संदीप माने ने पुष्टि की है कि कम से कम 8 लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जिन्हें पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है।
मलबे के नीचे दबे लोगों का पता लगाने के लिए डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है। संकरी गलियों में भारी मशीनें, जैसे जेसीबी (JCB) और दमकल की गाड़ियां रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। हालांकि, मलबे का वजन और मात्रा बहुत ज्यादा है, और मशीनें चलाते वक्त इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है कि अगर अंदर कोई जिंदा बचा है, तो उसे कोई नुकसान न पहुंचे। इस वजह से बचाव कार्य की रफ्तार थोड़ी धीमी है।
भिवंडी का यह हादसा महाराष्ट्र में इमारतों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। एक ऐसी इमारत जिसे प्रशासन पहले ही खतरनाक मान चुका था, वहां लोग अपनी जान जोखिम में डालकर क्यों रह रहे थे?
फिलहाल, एंबुलेंस मौके पर खड़ी हैं और भिवंडी की सांसें अटकी हुई हैं। बचाव दल ने तब तक मलबा हटाने की कसम खाई है, जब तक कि कोहिनूर बिल्डिंग के मलबे के नीचे दबे आखिरी व्यक्ति का पता नहीं चल जाता।
