बांकीपुर उपचुनाव 2026: प्रशांत किशोर ने बनाई मजबूत बढ़त, क्या ढह जाएगा भाजपा का 35 साल पुराना किला?
बांकीपुर उपचुनाव 2026: प्रशांत किशोर ने बनाई मजबूत बढ़त, क्या ढह जाएगा भाजपा का 35 साल पुराना किला?
पटना — बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होती नजर आ रही है। पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है और शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और मशहूर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) अपने पहले ही सीधे चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को कड़ी टक्कर देते हुए लगातार मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं।
यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं है, बल्कि यह प्रशांत किशोर के उस राजनीतिक मॉडल की पहली बड़ी परीक्षा है, जिसे उन्होंने दो साल की लंबी पदयात्रा और “जाति-धर्म से ऊपर उठकर वोट देने” की अपील के जरिए खड़ा किया है।
मतगणना के अब तक के रुझान
सोमवार, 3 अगस्त 2026 की सुबह 8 बजे से एएन कॉलेज, पटना में कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना शुरू हुई। निर्वाचन आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत किशोर शुरुआत से ही भाजपा उम्मीदवार पर हावी नजर आ रहे हैं:
- पहला राउंड: प्रशांत किशोर ने भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा पर 862 वोटों की बढ़त बनाई। किशोर को 2,225 वोट मिले, जबकि सिन्हा को 1,363 वोट।
- पांचवां राउंड: यह बढ़त बढ़कर 2,319 वोटों की हो गई। किशोर 8,971 वोटों के साथ आगे चल रहे थे, और सिन्हा 6,652 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर थे।
- आठवां राउंड: प्रशांत किशोर ने अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए 4,556 वोटों की बड़ी बढ़त हासिल कर ली है।
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता काफी पीछे छूट गई हैं और लगातार तीसरे स्थान पर संघर्ष कर रही हैं। कुल 30 राउंड की गिनती होनी है और अंतिम नतीजे दोपहर बाद या शाम तक आने की उम्मीद है।
बांकीपुर: भाजपा का अभेद्य किला
बांकीपुर विधानसभा सीट (जिसे 2008 के परिसीमन से पहले पटना पश्चिम कहा जाता था) पर 1995 से ही भाजपा का निर्विरोध कब्जा रहा है। यह चुनाव क्षेत्र भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ रहा है, जिन्होंने लगातार पांच बार यहां से जीत दर्ज की। अप्रैल 2026 में उनके राज्यसभा जाने के बाद ही यह सीट खाली हुई थी।
भाजपा ने इस सीट को बचाने के लिए युवा नेता नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा और पूरी ताकत झोंक दी। करीब 40 स्टार प्रचारकों ने इस क्षेत्र में पसीना बहाया। वहीं, आरजेडी ने रेखा गुप्ता पर दोबारा दांव खेला, जो 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन से 50,000 से अधिक वोटों से हार गई थीं।
प्रशांत किशोर ने जानबूझकर बांकीपुर जैसी “कठिन” सीट को चुना। उन्होंने कहा था, “जब लोग चुनाव लड़ना शुरू करते हैं, तो वे अपने लिए सुरक्षित सीट तलाशते हैं। मैं इसके उलट कर रहा हूं, क्योंकि मैं बिहार के लोगों को यह बताना चाहता हूं कि अगर बिहार को बदलना है, तो उन्हें जाति और धर्म से परे जाकर मतदान करना होगा।”
मतदान का कम प्रतिशत और पुलिस पर आरोप
30 जुलाई को हुए मतदान में केवल 34.30% मतदाताओं ने ही वोट डाला, जो कि पिछले विधानसभा चुनाव (41.45%) के मुकाबले काफी कम है। शहरी वोटरों की इस उदासीनता ने भी मुकाबले को दिलचस्प और अप्रत्याशित बना दिया है।
मतगणना से एक दिन पहले, रविवार रात प्रशांत किशोर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटना पुलिस और राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने जन सुराज के कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने और बिना किसी स्पष्ट कारण के हिरासत में लेने का काम किया है।
” वर्दी की आड़ में छुपकर चुनाव को प्रभावित करने और मतदाताओं को डराने की कोशिश की गई। जन सुराज से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। पटना के एसएसपी का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा। हमने चुनाव आयोग से इसकी लिखित शिकायत की है और जरूरत पड़ी तो अदालत भी जाएंगे।” — प्रशांत किशोर
किशोर ने आरोप लगाया कि 90 वर्षीय बुजुर्ग समर्थक तक को हिरासत में लिया गया था। हालांकि पुलिस ने बाद में कुछ लोगों को छोड़ दिया, लेकिन पीके ने इसे सत्ता का दुरुपयोग करार दिया।
अगर प्रशांत किशोर जीतते हैं तो क्या होगा?
बांकीपुर के नतीजे बिहार की भविष्य की राजनीति के लिए कई बड़े संकेत देंगे:
- जन सुराज का उदय: यदि प्रशांत किशोर यह चुनाव जीतते हैं या बहुत कम अंतर से भी हारते हैं, तो यह साबित हो जाएगा कि बिहार में पारंपरिक जाति-आधारित राजनीति (राजद-भाजपा ध्रुवीकरण) से इतर भी एक मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार हो रही है।
- भाजपा के लिए चेतावनी: सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है। भाजपा के 35 साल पुराने किले में सेंध लगना पार्टी के लिए एक बड़ा ‘वेक-अप कॉल’ होगा।
अब सबकी निगाहें एएन कॉलेज के मतगणना केंद्र पर टिकी हैं। क्या बांकीपुर का मतदाता इतिहास रचेगा या भाजपा अपना किला बचाने में कामयाब होगी, यह कुछ ही घंटों में स्पष्ट हो जाएगा।
