लाल सागर में हूती विद्रोहियों का कहर: प्रोजेक्टाइल हमले के बाद डूबा भारतीय जहाज ‘MSV फैज नूरे औलिया’, सभी 13 भारतीय सुरक्षित
लाल सागर में हूती विद्रोहियों का कहर: प्रोजेक्टाइल हमले के बाद डूबा भारतीय जहाज 'MSV फैज नूरे औलिया', सभी 13 भारतीय सुरक्षित
लाल सागर और अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) में एक बार फिर व्यापारिक जहाजों पर मंडराता खतरा हकीकत में तब्दील हो गया है। एक बेहद चिंताजनक घटनाक्रम में, यमन के तट के पास लाल सागर में एक भारतीय ध्वज वाले मालवाहक जहाज ‘MSV फैज नूरे औलिया’ (MSV Faize Noore Oliya) पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। हमले के बाद यह जहाज पलट गया और समुद्र में डूब गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस जानलेवा हमले में जहाज पर सवार सभी 14 क्रू मेंबर्स (जिनमें 13 भारतीय और एक यमनी नागरिक शामिल हैं) को सुरक्षित बचा लिया गया।
यह घटना लाल सागर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर हूती विद्रोहियों द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों का नवीनतम उदाहरण है, जिसने वैश्विक शिपिंग उद्योग और भारत जैसे देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को तुरंत रोकने का आह्वान किया है।
हमले का विवरण और यमनी तटरक्षक बल का रेस्क्यू ऑपरेशन
मीडिया रिपोर्ट्स और रक्षा सूत्रों के अनुसार, घटना मंगलवार, 4 अगस्त 2026 की है। भारतीय मालवाहक जहाज MSV फैज नूरे औलिया सऊदी अरब से माल (कथित तौर पर तेल) लेकर जा रहा था। जब यह जहाज यमन के होदेइदाह (Hodeidah) बंदरगाह से लगभग 13 समुद्री मील (नॉटिकल माइल्स) दूर था, तभी उस पर एक प्रोजेक्टाइल (जिसे कुछ रिपोर्ट्स में विस्फोटकों से लदी एक यमनी आत्मघाती नाव भी बताया गया है) से हमला किया गया।
विस्फोट इतना जोरदार था कि निहत्थे वाणिज्यिक जहाज ने अपना संतुलन खो दिया, वह पलट गया और अंततः लाल सागर की गहराइयों में समा गया। यमन सरकार से जुड़े ‘राष्ट्रीय प्रतिरोध बलों’ (National Resistance Forces – NRF) के अनुसार, जैसे ही हमले की सूचना मिली, यमनी नौसेना और तटरक्षक बल (Coast Guard) ने तुरंत एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। उनकी त्वरित कार्रवाई के कारण सभी 14 नाविकों को डूबते जहाज से सुरक्षित निकाल लिया गया। रेस्क्यू के बाद सभी क्रू मेंबर्स को मोखा बंदरगाह (Port of Mokha) पर लाया गया, जहां उन्हें मेडिकल सहायता प्रदान की गई। किसी भी क्रू मेंबर के हताहत होने की खबर नहीं है।
भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया: विदेश मंत्रालय और नौवहन मंत्री का बयान
इस गंभीर घटना पर भारत सरकार ने तुरंत और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए हमले की निंदा की। उन्होंने लिखा, “यमन के जलक्षेत्र के पास भारतीय MSV फैज नूरे औलिया पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया है, जिससे जहाज पलट कर डूब गया। भारत इस निहत्थे यंत्रीकृत नौकायन पोत (mechanised sailing vessel) पर हुए अकारण हमले की कड़ी निंदा करता है।”
सोनोवाल ने आगे कहा, “हमारे लोगों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और मुझे यह बताते हुए राहत मिल रही है कि यमनी तटरक्षक बल ने सभी 14 नाविकों (13 भारतीयों सहित) को सुरक्षित बचा लिया है।” उन्होंने यह भी बताया कि समुद्री प्रशासन के महानिदेशक (DGMA) को सभी एजेंसियों के समन्वय से क्षेत्र में भारतीय नाविकों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने और बचाए गए दल को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।
वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर इस हमले को “गहरी चिंता” का विषय बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम 4 अगस्त को यमन के तट पर लाल सागर में डूबने वाले भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज MSV फैज नूरे औलिया पर हुए हमले की निंदा करते हैं… रियाद स्थित हमारा दूतावास स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और क्रू की सुरक्षा के लिए यमनी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है। हम यमनी अधिकारियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देते हैं।”
मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में वाणिज्यिक नौवहन को निशाना बनाना बंद होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से स्वतंत्र और अबाधित नेविगेशन और व्यापार को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।
लाल सागर संकट: हूती विद्रोहियों का ‘नेवल ब्लॉकेड’ और वैश्विक व्यापार पर असर
हालांकि अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन यमनी अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यह हमला ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा किया गया है। हूती विद्रोही पिछले कई महीनों से लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab al-Mandeb Strait) में वाणिज्यिक जहाजों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बना रहे हैं।
हाल ही में, 20 जुलाई को हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ “नौसैनिक नाकाबंदी” (Naval Blockade) की घोषणा की थी, जिससे इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। हूती विद्रोहियों का दावा है कि वे उन जहाजों को निशाना बना रहे हैं जो सऊदी अरब या इजरायल से जुड़े हुए हैं। इस संघर्ष ने अमेरिका और ईरान के बीच छद्म युद्ध (Proxy War) को समुद्र तक पहुंचा दिया है।
लाल सागर दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट में से एक है, जो स्वेज नहर के माध्यम से यूरोप और एशिया को जोड़ता है। दुनिया के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। हूती हमलों के कारण कई प्रमुख वैश्विक शिपिंग कंपनियों को अपने जहाजों का रूट बदलकर अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इससे न केवल यात्रा का समय बढ़ा है, बल्कि परिवहन लागत, ईंधन और बीमा प्रीमियम में भी भारी उछाल आया है।
निष्कर्ष भारतीय ध्वज वाले जहाज का डूबना यह स्पष्ट करता है कि लाल सागर का संकट अब केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भारतीय हितों को प्रभावित कर रहा है। भारत के ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। इस घटना के बाद उम्मीद की जा रही है कि भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में गश्त और निगरानी को और बढ़ाएगी। फिलहाल, बचाए गए 13 भारतीयों को स्वदेश वापस लाने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और समन्वित कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।
