हरदीप सिंह पुरी को भाजपा ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव में उतारा, 12 नवंबर को मतदान
हरदीप सिंह पुरी को भाजपा ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव में उतारा, 12 नवंबर को मतदान
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बुधवार को जारी पार्टी बयान में बताया गया कि भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने पुरी के नाम को मंजूरी दी है। यह उपचुनाव पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट के लिए हो रहा है।
कब होगा मतदान और क्या है चुनाव कार्यक्रम
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक मध्य प्रदेश की इस राज्यसभा सीट के लिए मतदान 12 नवंबर को होगा। आयोग ने 22 अक्टूबर को उपचुनाव की घोषणा की थी और अधिसूचना 26 अक्टूबर को जारी हुई।
प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
- नामांकन की अंतिम तिथि: 2 नवंबर
- नामांकन पत्रों की जांच: 3 नवंबर
- नाम वापसी की अंतिम तिथि: 5 नवंबर
- मतदान: 12 नवंबर
- मतगणना: मतदान के बाद उसी दिन शाम को
राज्यसभा सदस्यों का चुनाव विधायक करते हैं। नियमों के अनुसार मतदान समाप्त होते ही मतगणना की जाती है, इसलिए नतीजा उसी शाम सामने आ जाएगा। अगर नाम वापसी के बाद मैदान में सिर्फ एक उम्मीदवार बचता है, तो उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा सकता है।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट
मध्य प्रदेश की यह सीट तब खाली हुई जब एल. मुरुगन ने अक्टूबर में केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा, दोनों से इस्तीफा दे दिया। वे संसदीय कार्य तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। रिपोर्टों के अनुसार सीट 14 अक्टूबर से रिक्त मानी गई। मुरुगन का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में मुरुगन ने कहा था कि वे जमीनी स्तर पर लौटकर कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होना चाहते हैं और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने में पूरा समय देना चाहते हैं। मध्य प्रदेश से राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं।
उत्तर प्रदेश की सूची से बाहर, अब मध्य प्रदेश से मौका
पुरी का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 5 अक्टूबर को भाजपा ने उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए आठ उम्मीदवारों की जो सूची जारी की थी, उसमें उनका नाम नहीं था। उस सूची में नए चेहरे उतारे गए थे और जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को आधार बताया गया था। पुरी के साथ केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा को भी दोबारा मौका नहीं मिला था।
उत्तर प्रदेश से पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है। पुरी पहली बार 2018 में उत्तर प्रदेश से उपचुनाव में निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे थे, जब मनोहर पर्रिकर के इस्तीफे से सीट खाली हुई थी। इसके बाद 2020 में उन्हें दोबारा उच्च सदन भेजा गया।
यूपी की सूची से नाम गायब होने के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर कयास लगने लगे थे। कुछ रिपोर्टों में केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चा भी हुई, हालांकि सरकार या भाजपा की ओर से ऐसी किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि मध्य प्रदेश भाजपा की ओर से चार-पांच नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा गया था, जिनमें पुरी का नाम भी चर्चा में रहा।
कौन हैं हरदीप सिंह पुरी
74 वर्षीय हरदीप सिंह पुरी मोदी सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय संभाल रहे हैं। इससे पहले वे आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। वे पूर्व नौकरशाह रहे हैं और 2018 में राज्यसभा में आने के बाद से केंद्र सरकार के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े मामलों में वे सरकार का पक्ष लगातार रखते रहे हैं।
राजनीतिक मायने
मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव विधानसभा के सदस्य करते हैं, इसलिए नतीजा सदन में दलों की ताकत पर निर्भर करेगा। विधानसभा में संख्याबल को देखते हुए भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। पहले भी मध्य प्रदेश के राज्यसभा उपचुनावों में भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जैसे 2024 में जॉर्ज कुरियन के मामले में हुआ था। विपक्ष अपना उम्मीदवार उतारता है या नहीं, यह नामांकन की अंतिम तारीख 2 नवंबर तक साफ हो जाएगा।
भाजपा के इस फैसले से पुरी के उच्च सदन में बने रहने का रास्ता खुल गया है। पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बजाय मध्य प्रदेश से भेजने का फैसला किया है, जो अतीत में भी कई नेताओं के लिए अपनाई गई रणनीति रही है।
आगे क्या
अब सबकी नजर पुरी के नामांकन दाखिल करने, कांग्रेस की रणनीति और 5 नवंबर तक नाम वापसी की प्रक्रिया पर रहेगी। अगर मुकाबला हुआ तो 12 नवंबर को भोपाल में विधानसभा परिसर में मतदान होगा और शाम तक नतीजा आ जाएगा। अगर कोई प्रत्याशी नहीं उतरा तो पुरी का निर्विरोध चुना जाना तय माना जाएगा।
