झारखंड बंद: रांची में छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में बीजेपी का राज्यव्यापी हड़ताल, हेमंत सोरेन सरकार पर बड़ा हमला
झारखंड बंद: रांची में छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में बीजेपी का राज्यव्यापी हड़ताल, हेमंत सोरेन सरकार पर बड़ा हमला
रांची: झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में उस वक्त बड़ा उबाल आ गया जब राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार को पूरे राज्य में ‘झारखंड बंद’ (Jharkhand Bandh) का आह्वान किया। यह कड़ा कदम सोमवार को रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्रों और युवाओं पर पुलिस द्वारा किए गए बर्बर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दागने और वाटर कैनन के इस्तेमाल के विरोध में उठाया गया है। “झारखंड परीक्षा विवाद” अब एक बड़े राजनीतिक घमासान में तब्दील हो चुका है, जिसने सत्तारूढ़ हेमंत सोरेन (Hemant Soren) सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
विवाद की जड़: आखिर क्यों सड़कों पर उतरे छात्र?
इस पूरे बवाल को समझने के लिए उस मूल कारण को जानना जरूरी है जिसने युवाओं को उग्र होने पर मजबूर किया। झारखंड के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में छात्र और नौकरी के इच्छुक युवा रांची में इकट्ठा हुए थे। उनका मुख्य आरोप राज्य की भर्ती परीक्षाओं में हो रही व्यापक धांधली, पेपर लीक और नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही लेटलतीफी को लेकर था। बेरोजगारी की मार झेल रहे इन युवाओं का धैर्य तब जवाब दे गया जब उन्हें लगा कि मौजूदा प्रशासन उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
अपनी मांगों को लेकर, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तुरंत सुधार की मांग करते हुए, प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को ‘विधानसभा घेराव’ (Vidhan Sabha Gherao) का आयोजन किया। चूंकि इस समय झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है, इसलिए छात्रों का उद्देश्य सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और शीर्ष विधायकों का ध्यान अपनी ओर खींचना था।
हिंसक झड़प: वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का मंजर
रांची की सड़कों पर स्थिति तब बेकाबू हो गई जब प्रदर्शनकारी छात्रों का विशाल हुजूम भारी सुरक्षा वाली विधानसभा के करीब पहुंच गया। आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, नौकरी की मांग कर रहे इन युवाओं ने स्थानीय प्रशासन द्वारा लगाए गए कई बैरिकेड्स तोड़ दिए। विधानसभा के गेट नंबर 1 की ओर बढ़ने से रोकने के लिए झारखंड पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के कड़े उपाय अपनाए।
घटनास्थल के प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो फुटेज से पता चलता है कि पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया। जब दृढ़ संकल्पित भीड़ पीछे हटने को तैयार नहीं हुई, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया और आंसू गैस के गोले दागे।
प्रदर्शनकारी गुटों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई अकारण और बेहद क्रूर थी, जिसमें कई महिलाओं सहित सैकड़ों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। दूसरी ओर, रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने बयान दिया कि विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद पुलिस को जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा। एसएसपी ने पुष्टि की कि उग्र भीड़ में शामिल कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा किए गए भारी पथराव के कारण कम से कम 14 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। अधिकारियों ने घोषणा की है कि शांतिपूर्ण विरोध को बाधित करने वाले उपद्रवियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा।
बीजेपी का हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा प्रहार
खून से लथपथ और घायल छात्रों की तस्वीरों ने विपक्षी दल बीजेपी को सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया है। झारखंड के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उस पर राज्य के युवाओं पर “अन्याय और अत्याचार” करने का आरोप लगाया।
समाचार एजेंसियों से बात करते हुए, साहू ने प्रशासन की इस दमनकारी नीति पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “रात के अंधेरे का फायदा उठाकर, और यहां तक कि दिन के उजाले में भी, आंसू गैस के गोले और अन्य चीजें दागी गईं, जिससे हमारे सैकड़ों बच्चे घायल हो गए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि युवा राज्य का भविष्य हैं और बीजेपी मूक दर्शक बनकर नहीं खड़ी रहेगी। साहू ने कहा, “वे हमारे बच्चे हैं। इसलिए, उनके समर्थन में, बीजेपी कार्यकर्ता कल (मंगलवार) सड़कों पर उतरेंगे और झारखंड को ठप कर देंगे,” और इसी के साथ उन्होंने राज्यव्यापी बंद की आधिकारिक घोषणा कर दी।
राजनीतिक बयानबाजी और दोहरा मापदंड: राहुल गांधी बनाम जे.पी. नड्डा
झारखंड परीक्षा विवाद अब राज्य की सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। पुलिस की इस कार्रवाई की कांग्रेस पार्टी ने भी आलोचना की, जो आश्चर्यजनक है क्योंकि कांग्रेस झारखंड में JMM के साथ सत्ता में भागीदार है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि युवाओं के शांतिपूर्ण विरोध का जवाब कभी भी क्रूर बल प्रयोग से नहीं दिया जाना चाहिए।
हालांकि, गांधी की इस टिप्पणी पर वरिष्ठ बीजेपी नेताओं ने तुरंत पलटवार किया। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने मोर्चा संभालते हुए कांग्रेस नेता पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। नड्डा ने गांधी को याद दिलाया कि कांग्रेस उसी राज्य सरकार का अभिन्न अंग है जिसने झारखंड में लाठीचार्ज का आदेश दिया था। उन्होंने गांधी की नैतिकता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस नेता वास्तव में पीड़ित छात्रों की आवाज सुन सकते हैं, जबकि उनकी अपनी पार्टी सोरेन प्रशासन की इन कार्रवाइयों में भागीदार है। बीजेपी ने गांधी की उस पुरानी मांग की भी याद दिलाई जिसमें उन्होंने दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की थी।
जेएलकेएम (JLKM) नेता देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ती तबीयत
इस राजनीतिक खींचतान के बीच, विरोध प्रदर्शन का मानवीय पहलू भी लगातार बिगड़ रहा है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो की स्थिति इस चल रहे आंदोलन का एक प्रमुख प्रतीक बन गई है। भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण बदलाव की मांग को लेकर महतो पिछले नौ दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे।
बेहद कमजोर स्वास्थ्य और ब्लड शुगर के खतरनाक स्तर तक गिर जाने के बावजूद, महतो ने सोमवार के मार्च में एक एम्बुलेंस में शामिल होकर अदम्य साहस दिखाया। JMM के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर हाथ में लिए महतो ने स्ट्रेचर पर लेटे-लेटे छात्रों की विशाल भीड़ को संबोधित किया। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, उनके सहयोगियों ने आरोप लगाया कि पुलिस लाठीचार्ज के दौरान महतो को भी चोटें आईं। इसके बाद उन्हें आपातकालीन चिकित्सा के लिए तुरंत रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
झारखंड बंद का क्या होगा असर?
बीजेपी द्वारा मंगलवार को पूर्ण बंदी के आह्वान के साथ, पूरे झारखंड में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है। सार्वजनिक परिवहन, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान और निजी व्यवसाय बंद रहने की उम्मीद है क्योंकि बीजेपी कार्यकर्ता रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो सहित सभी प्रमुख जिलों में लामबंद होने की योजना बना रहे हैं।
नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है क्योंकि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और सड़क जाम होने की आशंका है। बंद के दौरान हिंसा को और भड़कने से रोकने के लिए राज्य पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है और प्रमुख चौराहों पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) तैनात की गई है।
निष्कर्ष
रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज ने झारखंड में एक राजनीतिक आग भड़का दी है। एक तरफ जहां बीजेपी राज्य के युवाओं के लिए न्याय की मांग को लेकर अपने राज्यव्यापी बंद को सफल बनाने में जुटी है, वहीं सत्तारूढ़ जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन खुद को एक अनिश्चित स्थिति में पा रहा है। परीक्षा विवाद को लेकर जनता का भारी आक्रोश आगामी चुनावों में भी अपना असर दिखा सकता है। हेमंत सोरेन सरकार इस संकट से कैसे निपटती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
