बीरभूम में भंडाफोड़: रिटायर्ड बस ड्राइवर के घर से ₹28.5 करोड़ नकद और 15 किलो सोना जब्त, राज्य में मचा हड़कंप
बीरभूम में भंडाफोड़: रिटायर्ड बस ड्राइवर के घर से ₹28.5 करोड़ नकद और 15 किलो सोना जब्त, राज्य में मचा हड़कंप
कोलकाता/सूरी (बीरभूम) — पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे राज्य की राजनीति और प्रशासन में भूचाल ला दिया है। बुधवार, 29 जुलाई 2026 को बीरभूम जिला पुलिस द्वारा की गई एक मैराथन छापेमारी में एक सेवानिवृत्त सरकारी बस ड्राइवर के घर से भारी मात्रा में बेहिसाब नकदी और सोना बरामद किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मोहम्मद बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले देउचा गांव में हुई इस 24 घंटे लंबी छापेमारी में ₹28.5 करोड़ की नकदी और 15 किलोग्राम ठोस सोना (बिस्कुट और छड़ के रूप में) जब्त किया गया है।
यह पश्चिम बंगाल के हालिया इतिहास में सबसे बड़ी बरामदगियों में से एक मानी जा रही है। इससे पहले 2022 में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों से ₹50 करोड़ से अधिक की नकदी बरामद की गई थी।
इस पूरे मामले के केंद्र में मीनार मंडल नाम का व्यक्ति है, जिसके दो मंजिला मकान में यह अकूत संपत्ति छिपाई गई थी। मीनार मंडल ‘उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम’ (NBSTC) में बस ड्राइवर के रूप में काम करता था और 2017 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद से लगभग ₹35,000 की मासिक पेंशन प्राप्त कर रहा था। गांव में एक साधारण और शांत व्यक्ति के रूप में पहचाने जाने वाले मीनार के घर से करोड़ों का यह खजाना मिलने पर स्थानीय लोग भी हैरान हैं।
बरामदगी का पैमाना इतना विशाल था कि पुलिस को नकदी गिनने के लिए स्थानीय बैंक शाखा से पांच नोट गिनने वाली मशीनें मंगवानी पड़ीं। इसके अलावा सोने को तोलने के लिए कई सटीक तराजू भी मंगाए गए। वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार, अकेले 15 किलो सोने की कीमत लगभग ₹21.5 करोड़ आंकी गई है। नकदी और सोने को मिलाकर कुल जब्ती का मूल्य ₹50 करोड़ के करीब पहुंच गया है। बरामद किए गए धन और सोने को ले जाने के लिए पुलिस को कई लोहे के बक्से (ट्रंक) लाने पड़े।
हालांकि, जांचकर्ताओं का मानना है कि यह अकूत संपत्ति मीनार मंडल की नहीं है, बल्कि उसका घर इस काले धन को सुरक्षित रखने के लिए एक ‘सेफ हाउस’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। मामले का मुख्य संदिग्ध मीनार का रिश्तेदार (साला) टुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन है, जो बीरभूम जिले का एक कुख्यात और बेहद प्रभावशाली पत्थर और बालू व्यापारी है।
गुरुवार सुबह मीनार मंडल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। शुरुआती पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि यह पैसा और सोना एक संगठित अपराध रैकेट का हिस्सा है और इसे टुलु मंडल द्वारा उसके घर पर छिपाया गया था।
टुलु मंडल का प्रोफाइल और राजनीतिक संबंध इस पूरी घटना को और भी जटिल बनाते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, टुलु मंडल ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल के दौरान देउचा खदान बेल्ट में एक प्रमुख स्टोन रेवेन्यू कलेक्टर (पत्थर कर संग्रहकर्ता) के रूप में काम किया था। आरोप है कि जब मीनार मंडल सेवानिवृत्त हुआ, तो टुलु ने उसे देउचा के सात टोल गेटों में से एक पर अवैध रूप से खनन किए गए पत्थरों से भरे ट्रकों से ‘राजस्व’ (अवैध वसूली) इकट्ठा करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी थी।
जांचकर्ता अब इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या यह भारी भरकम नकदी सरकारी खजाने के लिए निर्धारित धन की चोरी और अवैध खनन सिंडिकेट से होने वाली काली कमाई का हिस्सा है।
टुलु मंडल को बीरभूम जिले के कभी कद्दावर टीएमसी नेता रहे अनुब्रत मंडल का बेहद करीबी सहयोगी माना जाता था। अनुब्रत मंडल खुद एक बड़े पशु तस्करी मामले में मुख्य आरोपी के रूप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में लंबा समय बिता चुके हैं। टुलु मंडल केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर भी रहा है। 2022 में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उसके घर और कार्यालयों पर छापा मारा था। उसके 48 घंटे के भीतर ही स्थानीय पुलिस ने उसे एक हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि बाद में वह जमानत पर रिहा हो गया, लेकिन मई 2026 में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से ही वह फरार चल रहा है। फरार होने के बावजूद, टुलु मंडल ने दिसंबर 2024 में अपनी बेटी की शादी में उदयपुर के ताज लेक पैलेस की तर्ज पर एक भव्य रिसेप्शन आयोजित कर सुर्खियां बटोरी थीं, जिसमें मनोरंजन जगत की कई हस्तियां शामिल हुई थीं।
इस विशाल जब्ती ने स्वाभाविक रूप से पश्चिम बंगाल में एक भयंकर राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस छापेमारी को अपने प्रशासन की “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति” की जीत करार दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अधिकारी ने लिखा, “यह स्पष्ट हो जाना चाहिए: जिस किसी भी व्यक्ति का अतीत दागदार रहा है और जिसने पिछली सत्ताधारी पार्टी के साथ सांठगांठ करके और सार्वजनिक संसाधनों का दोहन करके संपत्ति अर्जित की है, उसे बख्शा नहीं जाएगा। सार्वजनिक संपत्ति जनता की है, और इसे लूटने वालों को कानून की पूरी ताकत का सामना करना पड़ेगा। माफिया सिंडिकेट पर कार्रवाई जारी रहेगी।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले शासन के दौरान बीरभूम की पत्थर खदानों से वास्तविक अवैध वसूली 1,200 करोड़ रुपये से अधिक थी, जबकि सरकारी खजाने में केवल 110 करोड़ रुपये ही आते थे।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी के वफादार माने जाने वाले टीएमसी विधायक और प्रवक्ता कुणाल घोष ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, उन्होंने जांच के दायरे को बढ़ाने की वकालत करते हुए कहा, “मैं सुन रहा हूं कि ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोग उन नेताओं से निकटता से जुड़े थे जो अब खुद को ‘अच्छे टीएमसी सदस्य’ के रूप में पेश करते हैं। मैं सरकार से आग्रह करूंगा कि वह गहराई में जाए और उन लोगों की पहचान करे जिन्होंने ऐसे अपराधियों को आश्रय दिया और उनकी अवैध कमाई से लाभ उठाया।”
बीरभूम के पुलिस अधीक्षक विदित राज बुंदेश ने पुष्टि की है कि मीनार मंडल को सूरी की जिला अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी हिरासत की मांग करेगी। पुलिस की जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या इस परिवार ने किसी और स्थान पर भी इसी तरह की अवैध संपत्ति छिपा रखी है। देउचा का वह शांत इलाका अब पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है और इस खजाने के सामने आने से एक बार फिर बंगाल में बालू और पत्थर माफिया के गहरे प्रभाव की कलई खुल गई है।
